गोड्डा नगर परिषद क्षेत्र के मीट मंडी से उठने वाले धुएं और दुर्गंध ने स्थानीय निवासियों और राहगीरों का जीवन दूभर कर दिया है. जानकारी के अनुसार, मंडी में दिनभर के कामकाज के बाद बचे पशुओं के अवशेषों का सही तरीके से निस्तारण नहीं किया जा रहा है. इसके बजाय, इन अवशेषों में देर रात चुपके से आग लगा दी जाती है, जिससे पूरे इलाके में काले धुएं का गुबार फैल जाता है. स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि रात के समय इस मार्ग से गुजरना मुश्किल हो गया है. आंखों में जलन और दम घोंटू गंध के कारण रास्ते पर चलना दुरूह हो गया है. स्थानीय निवासी बताते हैं कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है. खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने के बावजूद घर में रहना कठिन हो गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक कचरे या पशुओं के अवशेषों को खुले में जलाने से भारी मात्रा में जहरीली गैसें निकलती हैं. इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और यदि समय रहते रोक नहीं लगायी गयी, तो स्थानीय लोगों में सांस और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं.
नगर परिषद और प्रशासन से मांग
मोहल्ले के लोगों ने नगर परिषद और संबंधित विभाग से मांग की है कि खुले में अवशेष जलाने वाले दुकानदारों को चिन्हित कर कड़ा जुर्माना लगाया जाये. साथ ही, मीट मंडी के कचरे का वैज्ञानिक और सही ढंग से निस्तारण सुनिश्चित किया जाये. इलाके में नियमित निरीक्षण किया जाए ताकि पर्यावरण से खिलवाड़ रोका जा सके. स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रदूषण और दुर्गंध से मुक्ति नहीं मिली, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.
