कोयला ढुलाई ठप, 81 कार्यकर्ताओं ने दी गिरफ्तारी
स्थानीयता नीति में संशोधन की मांग
सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बावजूद आंदोलकारियों का मनोबल ऊंचा रहा
इसीएल से केवल एक रैक कोयला ही निकला
दिन भर सड़क मार्ग से एक भी वाहन कोयला नहीं गया पीरपैंती
गोड्डा/ महगामा / बोआरीजोर :झारखंड विकास मोरचा द्वारा आहूत दो दिवसीय आर्थिक नाकेबंदी का गोड्डा में असरदार रहा. कहीं किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है. आर्थिक नाकेबंदी से गोड्डा जिले में कोयला पूर्ण रूप से ढुलाई बाधित रही. इससे इसीएल राजमहल परियोजना 75 लाख का नुकसान का अनुमान लगाया गया है. वहीं जिले में कुल 77 कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए. सभी को दिनभर कैंप जेल में रखे जाने के बाद शाम को बांड पर छोड़ा गया.महगामा के दियाजोरी के पास आर्थिक नाकेबंदी का नेतृत्व बोरियो के झाविमो नेता सूर्यनारायण हांसदा ने किया.
इनके साथ प्रदेश महिला मोरचा अध्यक्ष श्वेता पांडेय व पूर्व जिप सदस्य नीलमुनी हांसदा थी. सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने हाथ में झंडा व बैनर लेकर दियाजाेरी रेलवे ट्रैक पर बैठक कर एमजीआर रेल को रोक दिया. सभी सरकार के विरोध में नारे लगा रहे थे. वहीं सरकार से स्थानीयता नीति को वापस लेने की भी मांग कर रहे थे. जब तक सरकार इस मामले में कार्रवाई नहीं करती है, तो आंदोलन जारी रहेगा. इससे इसीएल के ललमटिया परियोजना से कोयला की ढुलाई पूरी तरह बाधित रही. इस कारण परियोजना को करीब 75 लाख रुपये के नुकसान होने का अनुमान है.
कार्यकर्ताओं को किया गिरफ्तार
रेल ट्रैक की जाम की सूचना मिलते ही महगामा एसडीओ संजय कुमार, एसडीपीओ समीर कुमार सवैया, थाना प्रभारी रेणु गुप्ता जाम स्थल पर पहुंचे. इनलोगों ने आंदोलनकारियों काे हटने को कहा. लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े थे. इसके बाद पुलिस ने एसडीओ ने निर्देश पर सूर्यनारयण हांसदा के साथ सभी 150 कार्यकर्ताओं को वाहन पर बैठाकर महगाामा के ऊर्जानगर स्थित बने अस्थायी कैंप जेल लाया. अंत में केवल 37 कार्यकर्ता कैंप जेल में थे.
इसीएल को नुकसान
आर्थिक नाकेबंदी का असर इसीएल के राजमहल कोल परियोजना पर पड़ा है. परियोजना से शनिवार को मात्र एक रैक कोयला का डिस्पेच फरक्का के लिये हुआ. इसके अलावा हाइवा, डंपर तथा ट्रक संचालकों ने स्वत: वाहनों को जीरो प्वांइट के पास खड़ा कर दिया. इस कारण पांच हजार टन कोयला का डिस्पेच नहीं हो पाया. इससे परियोजना को 75 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान है
गोड्डा जिला मुख्यालय में जिलाध्यक्ष सहित 44 लोगों ने दी गिरफ्तारी
गोड्डा-भागलपुर मार्ग किया जाम
जिला मुख्यालय में आर्थिक नाकेबंदी के दौरान झाविमो कार्याकर्ताओं ने गोड्डा भागलपुर मुख्य मार्ग को आइटीआइ मोड़ के पास जाम कर दिया. जिलाध्यक्ष धनंजय यादव के नेतृत्व में मोतिया गांव से जुलूस के साथ जेवीएम व झामुमो नेताओं ने स्थानीय नीति का विरोध किया. इस दौरान रघुवर सरकार के विरोध में नारे लगाये.जुलूस जैसे ही मुख्य सड़क पर पहुंचा तो पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस वाहन से प्रदर्शनकारियों को गांधी मैदान के इंडोर स्टेडियम स्थित कैंप जेल भेजा गया. इसके करीब 44 कार्यकर्ता थे. इसमें 14 महिला कार्यकार्ता थीं.
सुरक्षा में तैनात थी पुलिस
बंद के दौरान ललमटिया सिदो कान्हू चौक, ललमटिया पुराना चौक, ललमटिया चौक, परियोजना के जीरो प्वांइट में सुरक्षा को लेकर पुलिस बल तैनात थे. इसके लिये सीआइएसएफ के साथ जिला पुलिस तथा जैप व होमगार्ड जवानों की प्रतिनियुक्ति की गयी. वहीं महगामा से सूर्यनारयण हांसदा, नीलमनी हांसदा, श्वेता पांडेय, रामदेव यादव, मनमीत पोद्दार, राधिका देवी, रानी देवी, मो मुमताज, अनिता देवी सहित 37 कार्यकर्ता की िगरफ्तारी हुई.
गोड्डा से इनकी हुई गिरफ्तारी
दंडाधिकारी सौरभ कुमार सिन्हा व पुलिस पदाधिकारियों ने कुल 44 लोगों को गिरफ्तार किया. इसमें जिलाध्यक्ष सहित हेमंत यादव, बाबूलाल यादव, प्रवीण ठाकुर, सोनू राउत, डब्ल्यू भगत, निरंजन यादव, बुंदीलाल मंडल, दुखन माथा, रघु माथा, सुनील माथा, ज्योतिष हरिजन, राम यादव, शंभु नाथ यादव, अरविंद हरिजन, गांधी मरांडी, सोमू मरांडी, ज्योतिष मंडल, संजीव मिर्धा, भगत हेंब्रम, मीनु हरिजन,प्रामेदी मांझी, मैनेजर, नसीब मरांडी, श्रवण कुमार, सुभाष यादव, कैलू यादव, केसो यादव, प्रमीला देवी, श्यामा देवी, शीला देवी, बिजली देवी, सुनीता देवी, माला देवी, लारको देवी,मंशी देवी, रूकनी देवी, अरबी देवी, हेमा देवी, मिलन देवी, पुनिता देवी आदि हैं.
एसडीओ व एसडीपीओ कर रहे थे कैंप
बंदी को लेकर एसडीओ सौरभ कुमार सिन्हा व एसडीपीओ अभिषेक कुमार कैंप कर रहे थे. इनके साथ इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय व वरुण रजक भी थे. जुलूस के आइटीआइ मोड़ के पास पहुंचते ही प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया. बंद के दौरान वाहनों का परिचालन होता रहा.
सरकार के इशारे पर प्रशासन ने किया दमन : धनंजय
जिलाध्यक्ष धनंजय यादव ने कहा कि सरकार के इशारे पर जिला प्रशासन ने आंदोलन को दबाने का काम किया है. सरकार लाठी व प्रशासन का भय दिखाकर यहां के स्थानीय लोगों के अधिकारों का मारना चाहती है. यह नहीं होगा. सरकार को उनकी मांगों के समक्ष झुकना होगा.
