गोड्डा : 15 लाख की आबादी वाले गोड्डा जिला के एक मात्र सदर अस्पताल की व्यवस्था में अब तक कोई सुधार नहीं हो पाया है. सदर अस्पताल में डॉक्टरों का टोटा है. दो चार स्पेशलिष्ट चिकित्सक हैं, जिनके बदौलत ही सदर अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्था कायम है.
संवेदनशील होकर दिन व रात काम करने वाले डॉक्टरों को कुछ लोगों द्वारा बेवजह परेशान करने का काम किया जा रहा है. पंद्रह वर्षों में एक भी डॉक्टर का पदस्थापन सदर अस्पताल में नहीं कराया जा गया है. बावजूद दो चार चिकित्सक ही अस्पताल में इलाजरत रोगियों को संजीवनी देने का काम करते हैं. लेकिन समय समय पर वैसे चिकित्सकों को कोई मुद्दा बना कर परेशान किया जाता है.
आंख नाक कान के डॉक्टर नहीं
सदर अस्पताल में अब तक आंख कान नाक के डॉक्टर तक नहीं है. अस्पताल में वार्ड एटेंनडेंट, एनआइसीयू, चाईल्ड वार्ड, ओटी असीसटेंड, ड्रेसर, फिजिसियन, डेंटल, ईएनटी व चर्म रोग चिकित्सक नहीं है.
कई बार डॉक्टरों को किया गया है टारगेट
अस्पताल में कई बार गंभीर अवस्था में रोगियों को भरती कराया जाता है. रोगी के मौत के बाद लोगों द्वारा डॉक्टरों को कई बार टारगेट किया गया है. इससे डॉक्टरों को काफी परेशानी होती है.
