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ओके::अब तक नहीं हुई छठ घाटों की सफाई फ्लैग-हाल बोआरीजोर के छठ घाटों का – इसीएल तथा प्रखंड प्रशासन सफाई के मामले में मौन – 70 वर्षों से लोहंडिया बाजार तालाब, श्रीपुर तालाब तथा बोआरीजोर तालाब में अर्ध्य देते आये हैं श्रद्धालु-लोहंडिया तालाब की सफाई का काम इसीएल जबकि प्रखंड प्रशासन कराता है श्रीपुर व […]

ओके::अब तक नहीं हुई छठ घाटों की सफाई फ्लैग-हाल बोआरीजोर के छठ घाटों का – इसीएल तथा प्रखंड प्रशासन सफाई के मामले में मौन – 70 वर्षों से लोहंडिया बाजार तालाब, श्रीपुर तालाब तथा बोआरीजोर तालाब में अर्ध्य देते आये हैं श्रद्धालु-लोहंडिया तालाब की सफाई का काम इसीएल जबकि प्रखंड प्रशासन कराता है श्रीपुर व बोआरीजोर तालाब की साफ सफाई – सालों भर रहता है कचरे का अंबार पूजा के समय केवल खानापूर्ति कर दी जाती हैतसवीर-01 एवं 02 में तालाब की प्रतिनिधि, बोआरीजोर बोआरीजोर प्रखंड के सुदूर क्षेत्रों में छठ पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. लेकिन अब तक विभिन्न घाटों की साफ-सफाई नहीं हो पायी है. करीब पांच हजार व्रतियां प्रखंड के विभिन्न घाटों में अर्ध्य देंगी. इसको लेकर लोगों में काफी आक्रोश है. प्रखंड के प्रमुख तालाबों में लोहंडिया बाजार का तालाब, बोआरीजोर तालाब तथा श्रीपुर का तालाब है. इन तालाबों में लोहंडिया की सफाई इसीएल के जिम्मे है बाकी दो तालाबों की सफाई का जिम्मा प्रखंड प्रशासन का है. कहां क्या स्थिति बोआरीजोर प्रखंड के लोहंडिया बाजार के पास की तालाब में सर्वाधिक दो हजार से अधिक व्रति जुटते हैं. यहां करीब 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है. तालाब की साफ-सफाई का जिम्मा राजमहल कोल परियोजना के हाथों में रहने के बावजूद अब तक सफाई को लेकर कदम नहीं उठाया गया है. महापर्व को लेकर सफाई नहीं होने की वजह से लोगों में रोष है. बोआरीजोर तालाब: जंगल व तराई वाले प्रखंड बोआरीजोर के तालाब में छठमहापर्व पर करीब 700 व्रतियों की भीड़ जुटती है. तालाब में करीब 50 वर्षों से पूजा की जा रही है. तालाब की सफाई अब तक नहीं होने से लोगों में चिंता है. श्रीपुर तालाब : श्रीपुर तालाब में भी 40 वर्षों से क्षेत्र के लोग अर्ध्य देते आ रहे हैं. यहां लगभग 400 से अधिक व्रतियों की भीड़ जुटती है. सफाई का जिम्मा प्रखंड प्रशासन का है. लेकिन अब तक तालाब की सफाई नहीं करायी गयी है. तालाब के आस-पास कूड़ा-कचरा का अंबार लगा हुआ है. ……………………………………………. इसीएल की मनमानी को लेकर लोगों में आक्रोश है. सफाई का काम ठीक ढंग से नहीं किया जाता है. -आशुतोष कुमार, ग्रामीण…………………………………………… अब तक छठ घाटों की साफ-सफाई को लेकर प्रखंड प्रशासन व इसीएल असंवेदनशील नजर आ रही है. जिस कारण लोगों में काफी आक्रोश है. – संतोष साह, ग्रामीण……………………………………………..साफ-सफाई कम से कम 20 दिन पहले ही शुरू हो जानी चाहिए थी. लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है. – पूनम देवी, व्रति……………………………………………… गंदे तालाब में अर्ध्य देना हमारी मजबूरी है. जबकि चाहे तो 10 दिन पहले ही घाटों को चकाचक किया जा सकता है.संध्यामुनी देवी, व्रति.

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