अमवार गांव के दर्जनों आदिवासी परिवारों को थमाया 20 हजार का बिल, विभाग मौन

200 यूनिट फ्री बिजली योजना आदिवासी परिवारों के लिए बनी परेशानी

पोड़ैयाहाट प्रखंड के अमवार गांव में झारखंड सरकार की 200 यूनिट फ्री बिजली योजना आदिवासी परिवारों के लिए परेशानी बन गयी है. योजना के तहत 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त होने के बावजूद गांव के कई परिवारों को मात्र एक-दो पंखा और बल्ब जलाने पर 20 हजार से 28 हजार रुपये तक का बिजली बिल थमा दिया गया है.

क्या है मामला

अमवार गांव मुख्य रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्र है. यहां ज्यादातर परिवार दिहाड़ी मजदूरी करके जीवनयापन करते हैं. ग्रामीण हरिलाल मरांडी ने बताया कि उनके घर में केवल दो बल्ब और एक पंखा चलते हैं. महीने में बिजली खपत लगभग 60-70 यूनिट तक ही होती है. बावजूद इसके, विभाग ने 23,220 रुपये का बिल भेज दिया. इसी प्रकार, मैथ्यूस सोरेन को 28,583 रुपये, सुमन हेंब्रम को 23,500 रुपये, पकू किस्कू को 13,223 रुपये, संतोष किस्कू को 11,449 रुपये, चांदमुनी हांसदा को 10,429 रुपये और संजय मुर्मू को 8,827 रुपये का बिल भेजा गया. लगभग 25 परिवार इस समस्या से जूझ रहे हैं.

बिल देखकर उड़े होश

सुमन हेंब्रम ने बताया कि 23,500 रुपये का बिल उनके छह महीने के राशन के बराबर है. मैथ्यूस सोरेन ने कहा कि 28,583 रुपये का बिल भरना उनके बस की बात नहीं है. चांदमुनी हांसदा जैसी विधवा महिला को 10,429 रुपये का बिल थमा देना अन्याय है. ग्रामीणों का आरोप है कि मीटर रीडर कई महीनों से गांव नहीं आये और औसत बिल के नाम पर मनमाने रकम जोड़ी गयी. कुछ बिलों में पिछले बकाया के नाम पर भी हजारों रुपये जोड़ दिये गये, जबकि उपभोक्ता हर महीने नियमित बिल भरते रहे.

विभाग को दिया आवेदन, नहीं हुई सुनवाई

ग्रामीणों ने 20 दिन पहले सामूहिक रूप से बिजली विभाग के पोड़ैयाहाट कार्यपालक अभियंता कार्यालय में लिखित आवेदन दिया. इसमें प्रभावित उपभोक्ताओं ने मीटर जांच, बिल सुधार और दोषी कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की. कार्यपालक अभियंता ने जल्द जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक न कोई टीम जांच करने आयी और न ही बिल में सुधार हुआ. उल्टे विभाग अब बकाया वसूली के लिए दबाव बना रहा है.

योजना पर उठे सवाल

झारखंड सरकार ने अगस्त 2024 से घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने की घोषणा की थी. इसका लाभ गरीब और मध्यम वर्ग को मिलना था, लेकिन अमवार जैसे गांवों में गलत बिलिंग के कारण योजना विफल दिख रही है. स्थानीय मुखिया सुनील मरांडी ने कहा कि यह आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय है.

अब आंदोलन की चेतावनी

बिल से परेशान ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है. सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सोरेन ने कहा कि यदि सात दिन के अंदर सभी प्रभावित परिवारों के बिल सुधार नहीं किये गये तो अमवार से पोड़ैयाहाट बिजली कार्यालय तक पैदल मार्च और जरूरत पड़ने पर प्रखंड कार्यालय पर धरना दिया जाएगा. अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि किसी का कनेक्शन फिलहाल नहीं काटा जाएगा और उपभोक्ता की खपत 200 यूनिट से कम होने पर बिल शून्य कर दिया जाएगा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: SANJEET KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >