उद्योग विभाग हस्तकरघा, रेशम व हस्तशिल्प निदेशालय उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के रेशम कृषकों की प्रमंडलीय स्तरीय कार्यशाला का आयोजन सहायक उद्योग निदेशक (रेशम) के कार्यालय परिसर में हुई. मुख्य अतिथि डीडीसी स्मृता कुमारी थीं. अध्यक्षता सहायक उद्योग निदेशक (रेशम) सह जिला उद्योग महाप्रबंधक जगन्नाथ दास ने की. अतिथियों मे कार्यशाला का उद्घाटन किया. कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य तसर पादप संवर्धन व रोग प्रबंधन, कीटपालन व कोसा (कोकुन) उत्पादन तथा कोसा के लिए बीजागार का परीरक्षण करना था. कार्यशाला में बेंगाबाद, डुमरी, जगदीशपुर, गोविंदपुर, हजारीबाग और इटखोरी अग्र परियोजना के 300 सहायक व कर्मी उपस्थित थे. सहायक उद्योग निदेशक (रेशम) जगन्नाथ दास ने उपस्थित कृषकों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी. कहा कि तसर पादप संवर्धन के लिए मिट्टी की तैयारी बहुत महत्वपूर्ण है. मिट्टी को उपजाऊ और जल निकासी वाला होनी चाहिए. तसर पादप के बीजों को अच्छी तरह से तैयार करना चाहिए. बीजों को साफ करना, सुखाना और फिर बोना चाहिए. तसर पादप को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है. मिट्टी में पर्याप्त जल स्तर बनाए रखना जरूरी है. तसर पादप के पौधों के बीच निराई-गुड़ाई करें. इससे पौधों को वायु और प्रकाश मिलता है. रोग प्रबंधन के लिए तसर पादप के पौधों को फफूंदनाशक का छिड़काव करें. कीटनाशक का छिड़काव करने से पौधों को कीटों से बचाया जा सकता है. तसर पादप के पौधों पर कीटों की पहचान कर इसको नियंत्रित करें. इससे कीटों को नियंत्रित किया जा सकता है. कोसा उत्पादन के लिए तसर पादप के पौधों से कोसा की खेती करनी चाहिए. इससे कोसा का उत्पादन बढ़ सकता है. कार्यशाला में केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ प्रितेश सैनी, सेवानिवृत सहायक उद्योग निदेशक शंभूनाथ झा, ग्यानेश कुमार समेत काफी संख्या में कृषक उपस्थित थे.
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