परिजनों का कहना है कि उन्होंने रक्तदान कर ब्लड बैंक में खून जमा कराया था. बावजूद प्रोसेसिंग और ब्लड मैचिंग का हवाला देकर ब्लड बैंक के कर्मी लगातार टालमटोल करते रहे. इधर, महिला की हालत गंभीर होती चली गयी. अंतत: उसने इलाज के दौरान शुक्रवार दोपहर दम तोड़ दिया. मीना देवी की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया. परिजन अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे.
सूचना पर पहुंची पुलिस, अधिकारियों ने शुरू की जांच
सूचना मिलने पर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को शांत कराया. इस बीच, अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है. परिजनों का कहना था कि यदि समय पर खून उपलब्ध करा दिया गया होता, तो मीना की जान बचायी जा सकती थी. परिजनों का कहना था कि ब्लड डोनेट करने के बाद भी कर्मियों ने अगले दिन सुबह में आने को कहा. परिजन तय समय पर शुक्रवार की सुबह अस्पताल पहुंचे, लेकिन ब्लड उपलब्ध नहीं कराया गया.
लापरवाही के आरोप में ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन हटाये गये
ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन की लापरवाही उजागर होने पर स्वास्थ्य विभाग ने उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की है. पूरे मामले की जांच के बाद सिविल सर्जन डॉ बच्चा प्रसाद सिंह ने ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन शंभु महथा को तत्काल प्रभाव से कार्य से हटा दिया है. उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा गया है. सिविल सर्जन डॉ सिंह ने बताया कि संबंधित मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और उसे तत्काल ब्लड चढ़ाये जाने की आवश्यकता थी. बावजूद ब्लड मिलने के बाद भी लैब टेक्नीशियन ने खून देने में काफी विलंब किया. जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि ब्लड बैंक के स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती गयी है. उन्होंने कहा कि लैब टेक्नीशियन को कार्य से हटाकर उसको बर्खास्त करने के लिए एनआरएचएम को पत्र लिखा जा रहा है. पूरे मामले की विभागीय स्तर पर विस्तृत जांच जारी है.
