बगोदर वन क्षेत्र में पिछले 16 दिनों से डेरा डाले 30-35 हाथियों का झुंड अब तिरला पंचायत के डोरियो गांव पहुंच गया है. गुरुवार की रात खेतको में उत्पात मचाने के बाद हाथियों ने डोरियो में भी कई किसानों की फसल रौंद दी. मकई, धान और बादाम की फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. लगातार गांवों में हाथियों के प्रवेश से ग्रामीणों में डर के साथ वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी भी बढ़ रही है.
शनिवार सुबह करीब छह बजे हाथियों का झुंड औरा पंचायत के पथलडीहा नहर होते हुए जंगल की ओर बढ़ गया. इससे पहले डोरियो में हाथियों ने कई किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाया. पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि फारूक अंसारी ने गांव पहुंचकर प्रभावित किसानों से जानकारी ली और नुकसान का जायजा लिया. उन्होंने वन विभाग से हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर ले जाने की प्रभावी व्यवस्था करने की मांग की.
16 दिन से सक्रिय झुंड, फिर भी स्थायी समाधान नहीं
हाथियों का झुंड पिछले 16 दिनों से बगोदर वन क्षेत्र में लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूम रहा है. इस दौरान वह खेतको समेत सात-आठ पंचायतों के गांवों तक पहुंच चुका है. ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों के कारण करीब छह घरों, एक पोल्ट्री फार्म और कई एकड़ में लगी फसलों को नुकसान पहुंचा है.
ग्रामीणों का सवाल है कि जब वन विभाग को इतने दिनों से हाथियों की गतिविधियों की जानकारी है, तो उन्हें आबादी वाले इलाकों से दूर रखने के लिए स्थायी और प्रभावी रणनीति क्यों नहीं बनायी गयी. हर बार हाथियों के गांव में आने के बाद उन्हें भगाने और ग्रामीणों को सावधान रहने की अपील तक ही कार्रवाई सीमित रह जाती है.
फसल बर्बाद होने से किसानों की बढ़ी चिंता
हाथियों ने खेतों में लगी मकई, धान और बादाम की फसल को रौंदकर बर्बाद कर दिया है. किसानों के लिए यह नुकसान सीधे उनकी आय से जुड़ा है. ग्रामीणों का कहना है कि खेती पर निर्भर परिवारों को फसल के नुकसान का समय पर मुआवजा नहीं मिला, तो उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है.
लगातार हाथियों के गांवों में पहुंचने से किसानों को रात में खेतों की निगरानी करने में भी डर लग रहा है. हाथियों को भगाने की कोशिश में जान का खतरा होने की आशंका बनी रहती है.
जंगल और गांव के बीच बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष
हाथियों का लगातार आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचना केवल फसल और मकान के नुकसान का मामला नहीं है. यह मानव और वन्यजीव के बीच बढ़ते संघर्ष का संकेत भी है. जंगलों में भोजन और पानी की उपलब्धता कम होने पर हाथियों का खेतों और गांवों की ओर रुख करना इस संघर्ष को और बढ़ा सकता है.
ऐसे में हाथियों को केवल गांवों से भगाना स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता. वन क्षेत्र में भोजन-पानी की उपलब्धता, सुरक्षित हाथी कॉरिडोर और संवेदनशील गांवों की पहले से पहचान जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है.
हाथियों के पास जाने और वीडियो बनाने से मना
वन विभाग ने ग्रामीणों से हाथियों के झुंड के पास नहीं जाने की अपील की है. ग्रामीणों को हाथियों को छेड़ने या उनका फोटो-वीडियो बनाने से भी मना किया गया है. रात और सुबह अकेले खेत या जंगल की ओर नहीं जाने की सलाह दी गयी है.
ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से ये सावधानियां जरूरी हैं, लेकिन केवल अपील से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. हाथियों की गतिविधियों की लगातार निगरानी, संवेदनशील इलाकों में त्वरित सूचना व्यवस्था और प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा देने की व्यवस्था भी जरूरी है.
किसानों की मांग-तत्काल नुकसान का आकलन हो
ग्रामीणों ने वन विभाग से प्रभावित इलाकों का तत्काल सर्वे कराकर फसल और मकानों को हुए नुकसान का आकलन कराने की मांग की है. साथ ही हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर ले जाने के लिए विशेषज्ञ टीम और पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था करने की मांग उठ रही है.
अगर हाथियों का झुंड इसी तरह लगातार आबादी वाले क्षेत्रों में घूमता रहा, तो फसल नुकसान के साथ मानव और हाथियों के बीच टकराव का खतरा भी बढ़ सकता है. ऐसे में ग्रामीण अब तत्काल राहत के साथ दीर्घकालिक समाधान की उम्मीद कर रहे हैं.
