Giridih News :झारखंड महोत्सव की उपेक्षा से गोलबंद हो रहे ग्रामीण व पंडा समाज

Giridih News :सूबे के प्रसिद्ध तीर्थस्थल झारखंडधाम की गरिमा और पहचान अब स्थानीय लोगों की चिंता का विषय बन गयी हैं. झारखंड गठन के बाद केवल एक बार ही झारखंड महोत्सव का आयोजन हुआ है. सरकार की कार्यशैली से नाराज पंडा परिवार और स्थानीय ग्रामीणों ने शनिवार को एक बैठक कर इस उपेक्षा पर गहरा रोष व्यक्त किया है.

यहां के पुजारियों का कहना है कि सरकार की उदासीनता के कारण यह पवित्र स्थल अपनी पहचान खोता जा रहा है. हर साल अक्षय तृतीया के आते ही क्षेत्रवासियों में महोत्सव की उम्मीद जगती है, पर तिथि हाथ लगता है सिर्फ शून्य. आरोप है कि धाम के विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. महोत्सव के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है, जबकि बुनियादी सुविधाओं का बुरा हाल है. पुजारियों का मानना है कि आवंटित राशि का इस्तेमाल पर नहीं दिख रहा है और परंपरा नजरअंदाज की जा रही है.

पूर्व सांसद डॉ रवींद्र राय से लगायेंगे गुहार

वर्तमान स्थिति से क्षुब्ध होकर धाम का प्रतिनिधिमंडल पूर्व सांसद डॉ रवींद्र राय से मुलाकात करेगा. स्थानीय लोग मानते हैं कि धाम को राजकीय और सांस्कृतिक पहचान दिलाने में उनकी भूमिका निर्णायक रही है. पुजारियों ने बताया कि 14 अप्रैल 2016 को डॉ रवींद्र राय के प्रयासों से ही इस महोत्सव को भव्य स्वरूप मिला था. उस समय आयोजन में दिखने वाली रौनक अब अतीत का हिस्सा है. लोगों के आक्रोश का मुख्य कारण है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार इस पवित्र आयोजन को केवल एक सरकारी इवेंट की तरह देखती है.

हक और मान की लड़ाई

बैठक में पंडा परिवार ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई मान-सम्मान और विकास की है. उनकी प्रमुख मांगें झारखंड महोत्सव का नियमित और भव्य आयोजन, धाम परिसर में स्थायी बुनियादी ढांचे (पेयजल, धर्मशाला, सुरक्षा) का निर्माण, आयोजन में स्थानीय पंडा परिवार और परंपराओं को उचित सम्मान मिले. बैठक में नरेश पंडा, गिरीश पंडा, एस पंडा, नंदकिशोर पंडा, शालिग्राम पंडा, नकुल पंडा, कृष्णदेव पंडा, मोती पंडा, जयदेव पंडा, मनोज पंडा, सिकंदर पंडा, विनोद पंडा आदि मौजूद थे.

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By PRADEEP KUMAR

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