आवागमन में होती है भारी परेशानी : सड़क की हालत इतनी जर्जर है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. बारिश के दिनों में यह सड़क कीचड़ व तालाब में तब्दील हो जाती है. इससे गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट जाता है. सड़क खराब होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. उत्क्रमित मध्य विद्यालय जाने वाले विद्यार्थी कीचड़ और गड्ढों के कारण समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं. धर्मपुर के बुजुर्ग बताते हैं कि 2007-08 के दशक के बाद से इस सड़क पर कोई ठोस काम नहीं हुआ. चुनाव के समय सभी प्रत्याशी पक्की सड़क बनाने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव जीतते ही धर्मपुर की जनता और उनकी बुनियादी जरूरतें भूला दी जाती हैं. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे.
क्या कहते हैं ग्रामीण
पिछले 17 वर्षों से गांव की मुख्य सड़क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. सड़क पर बिछी गिट्टियां उखड़ चुकी हैं और अब वहां सिर्फ गहरे गड्ढे बचे हैं, जो राहगीरों के लिए हादसों का सबब बन रहे हैं. जनप्रतिनिधियों का ध्यान भी इस सड़क पर नहीं है
चिंतामणि वर्मा
सड़क की हालत इतनी खराब है कि आये दिन बाइक सवार और साइकिल सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं. सड़क जर्जर होने के कारण एंबुलेंस गांव के अंदर आने से कतराते हैं. मरीजों को मुख्य सड़क तक ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है.
कोदो महतो
बरसात के दिनों में सड़क तालाब का रूप ले लेती है, जिससे स्कूली बच्चों का घर से निकलना दूभर हो जाता है. वर्ष 2007 के बाद से इस सड़क की सुध लेनेवाला कोई नहीं है. चुनाव के समय नेता वोट मांगने आते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्या भूल जाते हैं.
धर्मेंद्र प्रसाद वर्मा
प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि उन्होंने कई बार आवेदन दिया और ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक चक्कर काटा, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला. सड़क की मरम्मत नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है.
कारू महतो
गांव के युवाओं और बुजुर्गों ने एकजुट होकर स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे. कई बार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई गंभीर नहीं हैं.
रोहन महतो
जिस उम्मीद से हमलोग जनप्रतिनिधि चुनते हैं, वह पूरी नहीं होती है. गांव की सड़क पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है. अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए. इसके कारण ग्रामीणों के परेशानी बढ़ती जा रही है. बारिश में कीचड़ और सामान्य दिनों में धूल से परेशानी होती है.
