पेशे से शिक्षक और खेती-बाड़ी के प्रति गहरी रुचि रखने वाले प्रमोद राम ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर दो एकड़ बंजर भूमि को हरियाली से भर दिया है. जो जमीन कभी अनुर्वर और वीरान मानी जाती थी, वहां आज कद्दू, झींगा, खीरा, भिंडी, मकई और बोड़ी की फसल लहलहा रही है. फिलहाल वह आदर्श उच्च विद्यालय, बुद्धूडीह में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं.
लगातार बढ़ती कीमतों से बनाया मन
लगातार सब्जियों की बढ़ती कीमतों और कृषि के प्रति रुझान को देखते हुए उन्होंने अपनी बंजर भूमि को खेती योग्य बनाने के लिए प्रयोग करने का संकल्प लिया. इसके लिए सर्वप्रथम जमीन की जुतायी करायी और फिर तरह-तरह की सब्जियों एवं मकई की खेती शुरू की.
खास तौर पर कद्दू, झींगा और खीरा जैसी लता वाली फसलों के बेहतर विकास के लिए उन्होंने बांस और प्लास्टिक की रस्सियों से जाल तैयार किया, जिससे पौधों को फैलने और बढ़ने में मदद मिली.
बंजर धरती की हरियाली देख मिलता है संतोष
मेहनत अब रंग लाने लगी है. खेत में लगे पौधों में सब्जियां आनी शुरू हो गयी हैं और उत्पादन भी होने लगा है. प्रमोद राम अपने परिवार की जरूरतों के लिए सब्जियां उपयोग कर रहे हैं, वहीं अतिरिक्त उपज को परिचितों के बीच वितरित करने के साथ बाजार में बेच भी रहे हैं.
प्रमोद राम बताते हैं कि जिस जमीन को लोग कभी बंजर समझते थे, वहां आज हरियाली देखकर उन्हें अपार संतोष मिलता है. उनका मानना है कि यदि प्रशासन या विभाग की ओर से सिंचाई कूप, डीप बोरिंग और सोलर पंप सेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं, तो वे खेती का और विस्तार कर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं. उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है.
