मुख्य वक्ता कबीर ज्ञान मंदिर गिरिडीह की साध्वी गीता बहन व नरवदा बहन थीं. कॉलेज की प्राचार्य डॉ शालिनी खोवाला व डीएलएड प्रभारी डॉ हरदीप कौर ने अतिथियों का स्वागत मोमेंटो देकर किया. साध्वी बहनों ने विद्यार्थियों को तनावमुक्त जीवन जीने की कला सिखायी. कहा कि वर्तमान समय में मानसिक तनाव एक गंभीर चुनौती बन चुका है, जिससे मुक्ति पाने के लिए सकारात्मक सोच, आत्मचिंतन, ध्यान व संतुलित जीवनशैली आवश्यक है. उन्होंने कबीर वाणी के माध्यम से विद्यार्थियों को धैर्य, आत्मविश्वास व आंतरिक शांति बनाये रखने का संदेश दिया. कहा कि चिंता नहीं, चिंतन करें.
प्रेरणा का संदेश दिया
उन्होंने कबीर दास के प्रसिद्ध दोहे चिंता ऐसी डाकिनी, काट कलेजा खाय, वैद्य बिचारा क्या करे, कहां तक दवा लगाया. इसका उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को चिंता से दूर रहकर रचनात्मक चिंतन अपनाने की प्रेरणा दी. उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता एवं सकारात्मक सोच ही जीवन में मानसिक संतुलन एवं सफलता का आधार है. साध्वी नरवदा बहन ने सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की कला व्यावहारिक उदाहरणों के साथ प्रेरित करते हुए बताया. उन्होंने गीतों के माध्यम से बच्चों में नयी ऊर्जा का संचार किया और वातावरण को सकारात्मक भावना से संचारित किया.
