Giridih News : पीरटांड़. सम्मेद शिखर इन दिनों धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर है. तीर्थक्षेत्र में आयोजित विविध धार्मिक कार्यक्रमों, मंगल प्रवचनों, गगनभेदी मंत्रोच्चारों तथा साधु-संतों के पावन सान्निध्य से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बन गया है. गुणायतन एवं तेरहपंथी कोठी में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. मौके पर आचार्य ज्ञेय सागर जी महाराज ने जन्मकल्याणक दिवस को अत्यंत पुण्यमय बताते हुए सिंगापुर एवं मलेशिया से आये श्रद्धालुओं से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन हेतु छोटे-छोटे नियम अपनाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि यही छोटे नियम आगे चलकर बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं.
इंद्र-इंद्राणी संवाद का भावपूर्ण मंचन :
कार्यक्रमों के सिसलिसे में बुधवार प्रातः काल भगवान का जन्म कल्याणक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की. इस दौरान सौधर्म इंद्र का सिंहासन कंपायमान होने तथा इंद्र-इंद्राणी संवाद का आकर्षक मंचन किया गया.आध्यात्मिक आनंद से श्रद्धालु हुए अभिभूत : गुनायतन में माता मरुदेवी की कोख से त्रिलोकनाथ के जन्म की घोषणा के साथ उत्सव का आयोजन हुआ और भव्य जुलूस की तैयारियां शुरू हुईं. 30 अप्रैल को भगवान का दीक्षा कल्याणक तथा एक मई को प्रातः वृहद शांति मंत्रों के साथ शांतिधारा, मुनि वृषभ सागर की आहार चर्या एवं दोपहर बाद ज्ञान कल्याणक की विधियां संपन्न होंगी. बुधवार की सुबह संत शिरोमणि आचार्यश्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, परम पूज्य मुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ का मंगल मिलन आचार्यश्री 108 वसुनंदी जी महाराज ससंघ एवं आचार्यश्री 108 वैराग्यनंदी जी महाराज ससंघ के साथ गुणायतन, मधुबन (शिखरजी) में संपन्न हुआ. इस पावन मिलन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक आनंद से अभिभूत कर दिया.
आचार्य वसुनंदी जी ने संस्मरण किया साझा :
अपने प्रवचन में आचार्य बसुनंदी जी महाराज ने कहा कि साधुओं के प्रति वात्सल्य भाव ‘सोलह कारण भावनाओं’ में सर्वोपरि है. उन्होंने उद्धृत किया कि वात्सल्य अंग सदा जो ध्यावे, सो तीर्थंकर पदवी पावे”, और बताया कि यह भावना तीर्थंकर पद प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है. उन्होंने कहा कि पद बाहरी तत्व है, जबकि वात्सल्य साधु जीवन की आत्मा है. यह हृदयों को जोड़ती और भेदभाव मिटाती है. आचार्य बसुनंदी जी ने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि परम पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज से उनकी अंतिम भेंट वर्ष 2022 में पपोरा जी में हुई थी. इससे पूर्व 1990 और 1995 में पथरिया सहित कई अवसरों पर उनके सान्निध्य में रहे. उन्होंने कहा कि आचार्यों का यह संगम देशभर के लिए प्रेरक है. यह मोक्षमार्ग को प्रशस्त करता है. गुणायतन में जारी निर्माण कार्यों को सराहते हुए कहा कि मुनि प्रमाणसागर महाराज की दूरदृष्टि से यह कार्य हजारों वर्षों तक स्मरणीय रहेगा.आचार्यों एवं साधु-संघ के दर्शन : मुनि प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि जन्मकल्याणक के साथ निर्ग्रंथ आचार्यों एवं साधु-संघ के दर्शन का अवसर मिलना अत्यंत सौभाग्यपूर्ण है. उन्होंने सभी से देव-शास्त्र-गुरु के प्रति भक्ति और साधुओं में गुण देखने की दृष्टि विकसित करने का संदेश दिया. कार्यक्रम में मुनि श्री संधान सागर, सार सागर, समादर सागर एवं रूप सागर महाराज ने भी वंदना प्रस्तुत कर आशीर्वाद प्राप्त किया. कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मचारी अशोक भैया एवं अभय भैया ने किया.
