मनरेगा संबंधी विकास कार्यों की गति पर विराम लग गया है. अभी मनरेगा से क्षेत्र में कूप निर्माण, डोभा निर्माण, आम बागवानी में सिंचाई कार्य सहित अन्य योजनाओं को प्राथमिकता के साथ पूरा करना जरूरी है.
छह दिन की कमाई 1692 रु से वंचित हैं मजदूर
सूत्रों के अनुसार बेंगाबाद के ढाई से तीन हजार मजदूरों को प्रतिदिन काम दिया जाता था. इन मजदूरों को प्रतिदिन 282 रु के हिसाब से छह दिन में 1692 रु का भुगतान होता था. ढाई हजार मजदूरों के खाते में प्रति सप्ताह 42 लाख 30 हजार रु का भुगतान हो रहा था. तीन सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार एक करोड़ 26 लाख 90 हजार रु का कार्य प्रभावित हुआ है. विदित हो कि नौ से 11 मार्च तक सांकेतिक हड़ताल के बाद 12 मार्च से रोजगार सेवक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे हैं. हड़ताल पर गये जेई और एई 30 मार्च को काम पर लौट आये हैं. बावजूद इसके मजदूरों का डिमांड शून्य बना हुआ है.नहीं की गयी वैकल्पिक व्यवस्था
मनरेगा कानून के अनुसार इच्छुक निबंधित मजदूरों को हर हाल में काम देना है. समय पर भुगतान का भी प्रावधान है. काम नहीं देने और समय पर भुगतान नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता और दंड का भी कानूनी प्रावधान है. फिलहाल तो सारी बातें कानून की किताबों तक ही सिमटी है. हड़ताल की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था का प्रावधान है. पंचायत सचिव और मुखिया चाहे तो मजदूरों को काम देकर योजना चालू रख सकते हैं, पर यहां तीन सप्ताह से ऐसा देखने को नहीं मिला है.
