Giridih News :तीन सप्ताह से नहीं मिला एक भी मजदूर को रोजगार

Giridih News :मनरेगा कर्मियों के हड़ताल पर गये तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है. हड़ताल समाप्त होने की कोई सुगबुगाहट भी नहीं है. हालांकि जेई और एई गत 30 मार्च को हड़ताल से लौट आये, पर तीन सप्ताह में एक दिन भी योजना के तहत निबंधित मजदूरों को बेंगाबाद में काम नहीं मिला है.

मनरेगा संबंधी विकास कार्यों की गति पर विराम लग गया है. अभी मनरेगा से क्षेत्र में कूप निर्माण, डोभा निर्माण, आम बागवानी में सिंचाई कार्य सहित अन्य योजनाओं को प्राथमिकता के साथ पूरा करना जरूरी है.

छह दिन की कमाई 1692 रु से वंचित हैं मजदूर

सूत्रों के अनुसार बेंगाबाद के ढाई से तीन हजार मजदूरों को प्रतिदिन काम दिया जाता था. इन मजदूरों को प्रतिदिन 282 रु के हिसाब से छह दिन में 1692 रु का भुगतान होता था. ढाई हजार मजदूरों के खाते में प्रति सप्ताह 42 लाख 30 हजार रु का भुगतान हो रहा था. तीन सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार एक करोड़ 26 लाख 90 हजार रु का कार्य प्रभावित हुआ है. विदित हो कि नौ से 11 मार्च तक सांकेतिक हड़ताल के बाद 12 मार्च से रोजगार सेवक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे हैं. हड़ताल पर गये जेई और एई 30 मार्च को काम पर लौट आये हैं. बावजूद इसके मजदूरों का डिमांड शून्य बना हुआ है.

नहीं की गयी वैकल्पिक व्यवस्था

मनरेगा कानून के अनुसार इच्छुक निबंधित मजदूरों को हर हाल में काम देना है. समय पर भुगतान का भी प्रावधान है. काम नहीं देने और समय पर भुगतान नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता और दंड का भी कानूनी प्रावधान है. फिलहाल तो सारी बातें कानून की किताबों तक ही सिमटी है. हड़ताल की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था का प्रावधान है. पंचायत सचिव और मुखिया चाहे तो मजदूरों को काम देकर योजना चालू रख सकते हैं, पर यहां तीन सप्ताह से ऐसा देखने को नहीं मिला है.

समीक्षा बैठक के नाम खानापूर्ति

प्रत्येक सप्ताह मनरेगा योजनाओं को लेकर समीक्षा बैठक होती थी. इसमें रोजगार सेवकों से मानव दिवस सृजन, कार्य की प्रगति, भुगतान की अद्यतन स्थिति, सामग्री मद में भुगतान की स्थिति, भेंडरों की सामग्री आपूर्ति सहित अन्य विषयों पर चर्चा होती थी, पर तीन सप्ताह के दौरान एक बार भी पंचायत सचिव और मुखिया से इसकी रिपोर्ट नहीं ली गयी है. साथ ही मजदूरों का ई-केवाईसी का कार्य भी नहीं हो पा रहा है.

डिमांड काटने का निर्देश दिया जायेगा : बीडीओ

इधर, बीडीओ सुनील कुमार मुर्मू का कहना है कि रोजगार सेवकों के हड़ताल पर चले जाने से मनरेगा योजना संचालित नहीं हो पा रही है. अब जेई और एई लौटे हैं. मजदूरों का डिमांड काटने का निर्देश पंचायतों को दिया जायेगा. अनुपालन की मॉनिटरिंग की जा रही है.

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Author: PRADEEP KUMAR

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