गिरिडीह में एसीबी की बड़ी कार्रवाई, घूस लेते धरा गए मनरेगा के जेई

Giridih News: गिरिडीह के राजधनवार प्रखंड में मनरेगा के कनीय अभियंता को एसीबी ने 5000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया. लाभुक से मापी चढ़ाने के नाम पर घूस मांगी गई थी. शिकायत के बाद एसीबी ने जाल बिछाकर कार्रवाई की. घटना से विभाग में हड़कंप मच गया है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

गिरिडीह से राकेश सिन्हा की रिपोर्ट

Giridih News: झारखंड के गिरिडीह जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मनरेगा के एक कनीय अभियंता (जेई) को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और आम लोगों के बीच भी इसकी चर्चा तेज हो गई है.

5000 रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया जेई

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजधनवार प्रखंड में तैनात मनरेगा के कनीय अभियंता अंकुश कुमार ने एक लाभुक से योजना के भुगतान के एवज में 5000 रुपये रिश्वत की मांग की थी. यह राशि मापी चढ़ाने के नाम पर मांगी जा रही थी, जो मनरेगा योजनाओं में भुगतान की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा होता है. शनिवार को एसीबी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी जेई को 5000 रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया. गिरफ्तारी के दौरान टीम ने मौके से रिश्वत की रकम भी बरामद की.

शिकायत के बाद एसीबी ने बिछाया जाल

बताया जा रहा है कि जब कनीय अभियंता ने लाभुक से रिश्वत की मांग की, तो उसने इसकी सूचना एसीबी को दी. शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की जांच शुरू की और आरोपों का सत्यापन किया. सत्यापन में आरोप सही पाए जाने के बाद एसीबी ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया. पूरी योजना के तहत टीम ने लाभुक को निर्देश दिया और जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की रकम ली, उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया.

मनरेगा योजनाओं में भ्रष्टाचार पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर मनरेगा योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं. गरीबों और जरूरतमंदों के लिए चलाई जा रही इस योजना में अगर अधिकारी ही रिश्वत मांगेंगे, तो इसका सीधा असर लाभुकों पर पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है. ऐसे में एसीबी की यह कार्रवाई एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है.

आगे की कानूनी कार्रवाई जारी

एसीबी की टीम आरोपी कनीय अभियंता से पूछताछ कर रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि मामले में और भी पहलुओं की जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस भ्रष्टाचार में कोई और शामिल तो नहीं है.

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सतर्क हो गए दूसरे विभाग के घूसखोर अधिकारी

इस कार्रवाई के बाद सरकारी विभागों में काम कर रहे अन्य अधिकारियों के बीच भी सतर्कता बढ़ गई है. वहीं, आम लोगों को उम्मीद है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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