Giridih News :झारखंड-बिहार की सीमा पर बसे गांवों में बिजली, सड़क व स्वास्थ्य सुविधा का अभाव

गावां प्रखंड के सुदूर गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. प्रखंड के लौरियाटांड़, तिलैया, दुधपनियां, बरमसिया, राजोखार, कुबरी, डुमरझाराव, गाढ़ी, शांख समेत अन्य गांवों में सड़क, स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा, बिजली व सिंचाई की समस्या से लोग परेशान हैं.

ये गांव झारखंड व बिहार की सीमा पर हैं. सभी गांव जंगल व पर्वत शृंखलाओं से घिरा है. गावां के दक्षिणी भाग में स्थित चरकी, तराई, हरलाघाटी आदि गांवों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है. दो दशक पूर्व इन क्षेत्रों में उग्रवाद चरम पर था. जमडार, तराई, बरमसिया व पिहरा में पुलिस पिकेट बनने पर क्षेत्र में शांति आयी. मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए पहुंच पथ व पुल पुलियों का निर्माण किया गया. वर्तमान में अधिकांश सड़कें जर्जर हो गयीं हैं. प्रखंड के तिलैया, बलथरवा, राजोखार, बरमसिया समेत हालत इस समय काफी जर्जर है. यही हाल निमाडीह चरकी तराय सड़क का भी है. सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं व मरीजों को होता है. सड़क जर्जर होने के कारण इन क्षेत्रों में वाहन जाने से कतराते हैं. कभी-कभी तो मरीजों को खटिया पर टांगकर प्रखंड मुख्यालय लाना पड़ता है. स्वास्थ्य उपकेंद्रो की स्थिति अच्छी नहीं है. केंद्र प्राय: बंद रहते हैं. शिक्षा की स्थिति भी ठीक नहीं है. कुछ गिने चुने विद्यालयों की बात छोड़ दी जाये, तो अधिकांश विद्यालय में पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति हो रही है. आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति भी अच्छी नहीं है.

रोजगार के नहीं हैं साधन

माइका खनन पर रोक के बाद इस क्षेत्र में रोजगार का साधन सिमट गया. माइका के कारण क्षेत्र में रौनक रहती थी, प्रतिदिन स्थानीय लोगों की कमाई हो जाती थी. इन क्षेत्रों में खेती की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. कुछ खेती है भी तो वह पूरी तरह मॉनसून पर निर्भर है. क्योंकि, सिंचाई का कोई साधन नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में वन विभाग ने पूरे वन क्षेत्र की मापी करवाकर उसमें ट्रेंच खुदवा कर पौधरोपण किया है, जिससे काफी लोगों की जमीन छिन गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा की योजनाओं में भी बिचौलियों के हावी रहने के कारण इससे भी रोजगार नहीं मिल पाता है. लोग पशुपालन व मेहनत मजदूरी करके किसी प्रकार दो जून भोजन की व्यवस्था कर पाते हैं. महिलाएं पत्तल, रस्सी आदि बनाने का कार्य करती है. क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास आदि का निर्माण कमोबेश हुआ है, लेकिन बिचौलियों से काम होने के कारण वह रहने लायक नहीं है. आवास बनने के बाद भी लोग अपने पुराने मिट्टी व फूस के घर में रहना पसंद करते हैं.

सुविधा नहीं मिलना चिंता का विषय

जिप सदस्य पवन चौधरी ने कहा किइस क्षेत्र के लोगों ने काफी त्याग व हिम्मत के बल पर क्षेत्र को शांत करवाया है. क्षेत्र में विकास के साथ-साथ रोजगार का साधन सरकार को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करवाना चाहिए. वर्तमान में सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों के लोग बुनियादी सुविधा नहीं मिल रही है, जो चिंता का विषय है.

प्रस्ताव के बाद भी नहीं हो रही पहल

प्रमुख ललिता देवी का कहना है कि सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकांश जनजाति, दलित व पिछड़े परिवार के लोग रहते हैं. यहां सड़कों की स्थिति काफी दयनीय है. स्वास्थ्य व रोजगार जैसे समस्याओं पर शीघ्र पहल होनी चाहिए. जर्जर सड़क को ले कई बार पंचायत समिति से प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: PRADEEP KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >