यह काम रात में होता है. बताया जाता है कि हर दिन तिसरी से लगभग 20 लाख से अधिक लागत के अवैध माइका की तस्करी की जाती है. अहम बात यह है कि संबंधित विभाग, तिसरी व गावां थाना की नाक के नीचे से इस गोरखधंधे को अंजाम दिया जाता है. इसके बावजूद प्रशासन चुप है.
कार्रवाई नहीं होने से माफिया का मनोबल बढ़ा
कार्रवाई नहीं होने से माइका माफियाओं का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है. दौरान खदानों में धड़ल्ले से डायनामाइट का भी प्रयोग किया जाता है. रात से लेकर अलसुबह तक माइका ढुलाई की जा रही है. सूत्रों के अनुसार इस अवैध कार्य में तिसरी मुख्यालय के एक दर्जन से ज्यादा लोग सक्रिय हैं. इनमें आधा दर्जन तिसरी, गावां और कोडरमा जिले के डोमचांच, ढोढ़ाकोला आदि के जंगलों में झोपड़ी बनवाकर रहते हैं. सारी तैयारी कर तिसरी से माइका कोडरमा जिल ले जाया जाता है. तिसरी प्रखंड के पचरुखी, खटपोंक, लोकाय, साखम, गोलगो, कर्णपुरा, डुब्बा, असनातरी, दानोंखूंटा, नारोटांड़, मनसाडीह समेत अन्य गांवों के पास खननन करवाया जाता है. इसके बाद गांव के ही घर में उसे जमा किया जाता है. इसके बाद रात से लेकर अलेसुबह तिसरी के खिजुरी, घंघरीकुरा और गावां के रास्ते से जमडार होते हुए डोमचांच व मसनोडीह, कोडरमा समेत अन्य स्थानों में खपाया जाता है. वहीं, गावां के तराई, हरलाडीह व कुसमाय से कोडरमा व गिरिडीह माइका भेजाता जता है. इस गोरखधंधे में तिसरी और गावां के कई माफिया और सफेदपोश लगे हुए हैं.
काम करने का बदला तरीका
कुछ माह पहले तक माइका माफिया जंगलों में खनन के बद तिसरी और गावां की कई फैक्ट्रियों में इसे संग्रहीत करवाते थे. इसके बाद ट्रकों से लोड कर गिरिडीह, डोमचांच, मसनोडीह और कोडरमा ले जाया जाता था. पिछले दिनों पुलिस और वन विभाग ने छापेमारी कर फैक्ट्रियों को सील कर दिया. इसके बाद कारोबार करने का तरीका ही बदल गया. अब माफिया खनन के बाद जंगली के पास के गांव में ही डंपिंग की जा रही है.
लगातार हो रही छापेमारी : रेंजर
गावां वन प्रक्षेत्र के रेंजर अनिल कुमार ने कहा कि माइका के अवैध कारोबार के खिलाफ वन विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है. छापेमारी भी की जाती रही है. इधर, फिर से माइका की तस्करी की खबर मिल रही है, जिस पर विभाग गंभीर है. किसी भी कीमत पर अवैध खनन और तस्करी नहीं करने दी जायेगी. तिसरी व गावां के सभी माफियाओं को चिह्नित किया जा रहा है.
