परिजनों के अनुसार तीन वर्ष पूर्व अंधविश्वास से जुड़े एक मामले में मुंशी सोरेन के साथ मारपीट हुई थी और उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था. परिवार के लिए गांव की सड़क, बिजली और पानी के उपयोग तक पर रोक लगा दी गयी थी. मृतक की बेटी शांति सोरेन ने बताया कि पिता का लंबे समय से इलाज चल रहा था, पर आर्थिक तंगी के कारण इलाज बाधित हो गया. गुरुवार सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और मौत हो गयी.
मुखिया, मांझी हड़ाम व पुलिस के हस्तक्षेप पर शुरू हुई अंतिम संस्कार की
प्रक्रिया
घटना की सूचना पुलिस व जनप्रतिनिधियों को दी गयी, पर तत्काल कोई पहल नहीं हुई. देर शाम चिरकी के मुखिया सोमरा हेंब्रम, मांझी हड़ाम, पुलिस तथा रिश्तेदारों के हस्तक्षेप के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो सकी. शांति सोरेन ने अंधविश्वास और सामाजिक बहिष्कार जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगाने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.
