आदिवासी संगठनों ने मंगलवार को सरिया में सात सूत्री मांगों को लेकर आदिवासी आक्रोश महारैली निकाली. इसके साथ ही सरिया अनुमंडल कार्यालय गेट पर विरोध प्रदर्शन भी किया. इनकी मांगों में मुख्य रूप से हाल के दिनों में सरिया थानांतर्गत आदिवासी बहुल एक गांव की नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ दुष्कर्म कर हत्या करने वाले गिरफ्तार दोषी गुलाम मुहीउद्दीन को फांसी की सजा की मांग, साथ ही कुड़मी जाति को आदिवासी श्रेणी में शामिल नहीं करना मुख्य है.
पारंपरिक हथियारों से लैस थे आंदोलनकारी
आदिवासी मांझी हड़ाम रामजी मुर्मू तथा लालजीत मरांडी के नेतृत्व में सरिया हाईस्कूल स्टेडियम से मंगलवार की दोपहर सैकड़ों आदिवासी महिला-पुरुष हाथों में पारंपरिक हथियारों के साथ सरिया बाजार, झंडा चौक होते हुए सरिया अनुमंडल मुख्यालय पहुंचे और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. आदिवासी नेताओं ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर निशाना साधते हुए हेमंत सरकार को आदिवासियों का सबसे बड़ा विरोधी करार दिया. इन दिनों झारखंड में बहू बेटियों के साथ दुष्कर्म, हत्या व छेडख़ानी आम बात है और हेमंत सोरेन की सरकार चुप्पी साधे हुए हैं. लोगों ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को रखने का अधिकार सबको है. परंतु पिछले दिनों कुर्मी समुदाय के लोग रेल टेका कार्यक्रम किए, जो असंवैधानिक था. कहा कि विनोद बिहारी महतो अपने आप को क्षत्रीय कहते थे, परंतु आज कुर्मी समाज के लोगों को ओबीसी नहीं, बल्कि अनुसूचित जनजाति का दर्जा लेने का लोभ हो गया है. वे आदिवासी बनकर उनके हक अधिकार को छीनने के फिराक में हैं. आदिवासियों के इस विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम को पीरटांड़ के पूर्व प्रमुख सिकंदर हेम्ब्रम, टुंडी प्रखंड से आदिवासी नेत्री डा. बसंती हेम्ब्रम, प्रखंड अध्यक्ष रामजी मुर्मू आदि ने संबोधित किया. तत्पश्चात एक प्रतिनिधिमंडल सरिया एसडीएम संतोष गुप्ता से मिलकर सात सूत्री मांग पत्र को सौंपा जिस पर एसडीएम ने आदिवासी नेताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनकी मांगों को संबंधित विभाग को भेजा जायेगा. इस आक्रोश मार्च को लेकर सरिया में पुलिस प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था थी. मौके पर बालेश्वर मरांडी, लालजीत मरांडी, नन्हकू मरांडी, नुनूलाल मरांडी, टेकलाल हांसदा, महादेव मांझी, शिवलाल सोरेन, जीवलाल मूर्मू, दिनेश टुडू, ईश्वर हांसदा, पतिराम सोरेन समेत सैकड़ों लोग शामिल थे.
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