धान की रोपाई का सीजन लगभग खत्म हो चुका है और पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के बीच छिंटपुट धनरोपनी जारी है. इस वर्ष अल्प वर्षा की स्थिति यह है कि 15 अगस्त तक जिले में 47.06 प्रतिशत धनरोपनी हुई है. सरकारी आंकड़ों की बात करें तो जिले में लक्ष्य 88,000 हेक्टेयर के अनुपात में महज 41855 हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो सकी है.
जानकारी के अनुसार इस वर्ष रोहणी नक्षत्र के बाद से न के बराबर बारिश होने से खेती बाड़ी की गति काफी धीमी है. अल्प वर्षा के कारण कृषक सुखाड़ की आशंका के बीच धनरोपनी में जुटे रहे. हालांकि कृषकों ने बारिश की उम्मीद के साथ दोनों स्तर (सूखे खेत में बिचड़ा डालने और गहरे खेत में अछरा लगाने) पर खेती का प्रयास किया और पटवन कर के खेती की.
इसके बावजूद धनरोपनी का पूरा सीजन बीत जाने के बाद भी आधे से ज्यादा खेत परती पड़े हैं. कृषकों की मानें तो अल्प वर्षा से सुखाड़ की स्थिति बन रही है. बारिश की कमी के बीच हमने भगवान भरोसे सिंचाई कर आधे अधूरे खेतों में धनरोपनी की है. कहा कि दो दिनों से हो रही बारिश से कुछ उम्मीद बढ़ी है कि जितनी खेती हुई है कम से कम उसकी जान बच जाएगी.
