प्रथम व द्वितीय सत्र के विषय विशेषज्ञ हैदराबाद विश्वविद्यालय के शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जेवी मधुसूदन थे. उन्होंने भारतीय ज्ञान पद्धति और शिक्षण विषय पर अत्यंत ज्ञानवर्धक और रोचक व्याख्यान प्रस्तुत किया. प्रो मधुसूदन ने पारंपरिक कक्षा शिक्षण प्रणाली और आधुनिक ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था की सैद्धांतिकी तथा उसके व्यावहारिक पक्षों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझना आवश्यक है, लेकिन कक्षा शिक्षण में शिक्षक और छात्र के बीच जो प्रत्यक्ष संवाद और भावनात्मक जुड़ाव होता है, वह शिक्षा को अधिक सार्थक बनाता है.
एआई शिक्षण को अधिक प्रभावी, नवाचारी और छात्र-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है
तीसरा सत्र ऑनलाइन माध्यम से आयोजित हुआ, जिसमें आइयूसीटीई बीएचयू की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ कुशाग्री सिंह ने अध्ययन-अध्यापन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका और संभावनाओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि एआई शिक्षण को अधिक प्रभावी, नवाचारी और छात्र-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. प्रो बालेंदु शेखर त्रिपाठी ने प्रो. मधुसूदन की अध्ययनशीलता, स्पष्ट अवधारणा और संवादात्मक व्याख्यान शैली की सराहना करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. बलभद्र ने किया. वहीं, कॉलेज के प्राचार्य डॉ मृगेंद्र नारायण सिंह ने सभी विषय विशेषज्ञों एवं प्रतिभागी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया. कार्यशाला में लंगटा बाबा कॉलेज मिर्जागंज, आदर्श कॉलेज राजधनवार, केएन. बख्शी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, स्कॉलर बीएड कॉलेज, सुभाष टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, पारसनाथ कॉलेज इसरी बाजार तथा गिरिडीह कॉलेज के शिक्षक भाग ले रहे हैं.
