देवरी प्रखंड के गादिदिघी पंचायत अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय विशनपुर में शिक्षकों की कमी ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिये हैं. पहली से लेकर पांचवीं कक्षा तक यहां नामांकित बच्चों का भविष्य एक शिक्षक के भरोसे है. ऐसे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाना शिक्षक की मजबूरी तो है, पर व्यवस्था पर बड़ा सवाल है. इससे बच्चों को उनकी कक्षा और स्तर के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाना संभव ही नहीं.
शिक्षा व्यवस्था के दावे पर सवाल
पांच कक्षाएं, एक शिक्षक और 52 विद्यार्थी—विद्यालय की यह तस्वीर शिक्षा व्यवस्था के उस दावे पर सवाल खड़ा करती है, जिसमें प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की बात कही जाती है.
एक शिक्षक के सामने न केवल पांच कक्षाओं के बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी है, बल्कि विद्यालय से जुड़े अन्य गैर शैक्षणिक कार्य भी हैं. ऐसे में शिक्षक के लिए सभी बच्चों पर समान रूप से ध्यान देना कितना संभव है, यह बड़ा सवाल है.
पहले थे दो शिक्षक, अब एक के भरोसे चल रहा स्कूल
बताया जाता है कि कुछ समय पहले तक विद्यालय में दो शिक्षक पदस्थापित थे. पूर्व प्रधानाध्यापक के सहायक आचार्य पद पर चयनित होने के बाद विद्यालय में शिक्षकों की संख्या घटकर एक रह गयी.
इसके बाद से विद्यालय संचालन और बच्चों की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी सहायक अध्यापक संजीत तिवारी के कंधों पर आ गयी है. शिक्षा में संसाधन झोंकनेवाली सरकार की नीति तो कटघरे में है ही, पर शिक्षक की परेशानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
नामांकन नहीं बढ़ने का कारण खराब व्यवस्था भी
शिक्षक की कमी का सीधा असर कक्षा संचालन पर पड़ रहा है. पांच अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है. इससे बच्चों की सीखने की गति, व्यक्तिगत शैक्षणिक जरूरत और कक्षा-वार पाठ्यक्रम पूरा कराने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. यह भी एक कारण है कि नामांकन को नहीं बढ़ाया जा रहा है.
विभाग को जानकारी, फिर भी समाधान का इंतजार
विद्यालय के सहायक अध्यापक सह सचिव संजीत तिवारी ने बताया कि विद्यालय में एक अतिरिक्त शिक्षक की प्रतिनियुक्ति हो जाने से समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है. शिक्षक की कमी की जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी गयी है.
समस्या की जानकारी विभाग को दी गयी है : बीपीओ
देवरी की बीपीओ श्रद्धा कुमारी ने बताया कि बच्चों की संख्या के अनुसार विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की गयी है. कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, जिसकी जानकारी वरीय पदाधिकारियों को दे दी गयी है.
अभिभावक पूछ रहे, कब तक चलेगी यह व्यवस्था
सवाल यह है कि विभाग को स्थिति की जानकारी होने के बावजूद विशनपुर के 52 बच्चों को कब तक एक शिक्षक के भरोसे पढ़ना पड़ेगा? पांच कक्षाओं के लिए एक शिक्षक की व्यवस्था बच्चों के शिक्षा के अधिकार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के सरकारी दावों की कसौटी पर कितनी खरी उतरती है, यह व्यवस्था को तय करना होगा.
