Giridih News: गिरिडीह ओसीपी परिचालन को नौ आउटसोर्सिंग कंपनियां रेस में

Giridih News: गिरिडीह ओसीपी आउटसोर्सिंग मोड में चलाया जाना है, इसलिए आउटसोर्सिंग का नाम फाइनल होने के बाद सीटीओ प्राप्त कर उत्पादन कार्य शुरू होने की प्रबल संभावना है.

सीसीएल की गिरिडीह ओपेनकास्ट परियोजना को ईसी और सीटीई मिलने के बाद अब क्षेत्र में सीटीओ का बेसब्री से इंतजार हो रहा है. सीटीओ को लेकर प्रबंधन के स्तर से कवायद तेज है.

मुख्यालय स्तर पर होगी स्क्रूटनी

जानकारी के मुताबिक परियोजना के संचालन के लिए नौ आउटसोर्सिंग कंपनियों ने जेम (जीइएम) पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया है. सीसीएल मुख्यालय स्तर पर इन आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद अर्हता पूरी करने वाली कंपनी को ओबी रिमूवल और उत्पादन की जिम्मेदारी दी जायेगी. इसमें लगभग एक माह का समय लग सकता है. सूत्रों के मुताबिक सितंबर के बाद ओसीपी से उत्पादन शुरू हो जायेगा.

उत्पादन बंद होने से कोलियरी की रौनक छिनी

गिरिडीह ओसीपी में जनवरी 2022 से कोयला का उत्पादन बंद है. उत्पादन बंद रहने से इसकी रौनक छिन गयी है. उत्पादन बंद रहने से एक ओर जहां सीसीएल और राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, तो दूसरी ओर कोयला व्यवसाय से जुड़े लोग भी प्रभावित हुए हैं. उत्पादन ठप रहने से कोयला लोडिंग करने वाले कई मजदूर पलायन कर गये हैं. कुछ मजदूर हैं जो ओसीपी के पुन: चालू होने का इंतजार कर रहे हैं.

ओसीपी चालू करने की चल रही प्रक्रिया

विदित हो कि वन विभाग के साथ सीसीएल के विवाद की वजह से गिरिडीह ओसीपी को ईसी (एनवायरमेंटल क्लीयरेंस) नहीं मिल रहा था. इस दिशा में नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, झामुमो राज्य सभा सदस्य डॉ सरफराज अहमद एवं गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन का प्रयास रंग लाया. ईसी मिलने के बाद जीएम गिरीश कुमार राठौर, पीओ जीएस मीणा एवं एरिया इन्वॉयरमेंटल ऑफिसर शम्मी कपूर के प्रयास से इसे सीटीई (कंसेंट टू इस्टेब्लिश) मिल गया. अब कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) के लिए प्रयास तेज है. इधर, जीएम का कहना है कि ओसीपी चालू करने की प्रक्रियाएं चल रही हैं. जल्द ही यहां से उत्पादन शुरू हो जायेगा.

ओसीपी से कोयला उत्पादन की स्थिति

वित्तीय वर्ष – उत्पादन (टन में)

1993-94 – 78 हजार

1994-95 – 82 हजार1995-96 – 85 हजार

1996-97 – 79 हजार1997-98 – 90 हजार

1998-99 – 47 हजार1999-2000 – 81 हजार

2000-01 – 65 हजार2001-02 – 1 लाख

2002-03 – 1.34 लाख2003-04 – 1.90 लाख

2004-05 – 1.40 लाख2005-06 – 1.66 लाख

2006-07 – 1.77 लाख2007-08 – 2.03 लाख

2008-09 – 2.10 लाख2009-10 – 2.11 लाख

2010-11 – 2.27 लाख2011-12 – 3.43 लाख

2012-13 – 3 लाख2013-14 – 3 लाख

2014-15 – 2.92 लाख2015-16 – 2.32 लाख

2016-17 – 1.82 लाख2017-18 – 4.51 लाख

2018-19 – 1.87 लाख2019-2020 – 1.28 लाख

2020-21 – 1.15 लाख2021-22 – 99 हजार

2022-23 – 0.002023-24 – 0.00

2024-25 – 0.002025-2026 (अगस्त माह तक) – 0.00

ओसीपी से कोयला उत्पादन की स्थिति

वित्तीय वर्ष – उत्पादन (टन में)

1993-94 – 78 हजार

1994-95 – 82 हजार1995-96 – 85 हजार

1996-97 – 79 हजार1997-98 – 90 हजार

1998-99 – 47 हजार1999-2000 – 81 हजार

2000-01 – 65 हजार2001-02 – 1 लाख

2002-03 – 1.34 लाख2003-04 – 1.90 लाख

2004-05 – 1.40 लाख2005-06 – 1.66 लाख

2006-07 – 1.77 लाख2007-08 – 2.03 लाख

2008-09 – 2.10 लाख2009-10 – 2.11 लाख

2010-11 – 2.27 लाख2011-12 – 3.43 लाख

2012-13 – 3 लाख2013-14 – 3 लाख

2014-15 – 2.92 लाख2015-16 – 2.32 लाख

2016-17 – 1.82 लाख2017-18 – 4.51 लाख

2018-19 – 1.87 लाख2019-2020 – 1.28 लाख

2020-21 – 1.15 लाख2021-22 – 99 हजार

2022-23 – 0.002023-24 – 0.00

2024-25 – 0.002025-2026 (अगस्त माह तक) – 0.00

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Author: MAYANK TIWARI

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