गिरिडीह : गर्मी के दस्तक देने से पूर्व ही कई सरकारी स्कूलों में लगे चापाकलों ने पानी देना कम कर दिया है. इससे स्कूल की प्रबंध समितियां परेशान है. खराब पड़े चापाकल शोभा की वस्तु बनकर रह गये हैं. ज्ञात रहे कि वर्ष 2007-08 में सर्व शिक्षा अभियान द्वारा बनाये जा रहे नये स्कूल भवन के समय प्रत्येक स्कूल में चापाकल लगाने का प्रावधान तय किया गया था.
उस समय नये स्कूल भवन के लिए अभियान कार्यालय द्वारा 4.94 लाख की राशि मुहैया करायी गयी थी. इसी राशि से 30 हजार रुपये में चापाकल लगाया जाना था. पूरे जिले में करीब 1200 से अधिक स्थानों पर नये स्कूल भवन निर्माण किया गया और इसके साथ ही चापाकल भी लगाये गये, लेकिन विगत 12 वर्षों के दौरान कई चापाकलों ने पानी देना कम कर दिया है. इससे ये शोभा की वस्तु बनकर रह गये हैं.
विभाग द्वारा की गयी समीक्षा के दौरान यह बात उभरकर सामने आयी है कि जिले के 68 सरकारी स्कूलों में पानी की किल्लत है. ऐसे में विभाग ने उन स्कूलों में नये सिरे से चापाकल लगाने के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भी भेजा है. बीते शुक्रवार को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग में दिये गये निर्देश के बाद विभाग ने ऐसे स्कूलों की सूची तैयार कर ली है. जिन स्कूलों में पानी की घोर किल्लत है. वहां मार्च माह के शुरुआती दौर में ही नये सिरे से चापाकल लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है.
इस प्रस्ताव को मानव संसाधन विकास विभाग के पास भेजा जायेगा और वहां से मंजूरी मिलने तथा चापाकल के मद में अतिरिक्त राशि आवंटित होने के बाद संबंधित स्कूलों में नये सिरे से चापाकल लगाये जायेंगे. वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग में विभागीय सचिव ने यह निर्देश दिया है कि जिन स्कूलों में चापाकल के साथ-साथ शौचालय की सुविधा नहीं है, उसकी भी सूची बनाकर विभाग को समर्पित करें.
