गिरिडीह : बेंगाबाद स्थित खुरचुट्टा निवासी रूबी कुमारी की मौत ने फिर डॉक्टरों की लापरवाही को उजागर कर दिया है. प्रसव पीड़ा होने पर 20 वर्षीया रूबी शनिवार की रात गिरिडीह सदर अस्पताल पहुंची, लेकिन उसे क्या पता था कि बच्चे के जन्म के साथ ही उसकी आंखें बंद हो जायेगी और वह मां बनने के सुख से वंचित हो जायेगी. घटना शनिवार की रात की है.
रात लगभग 1.55 बजे सदर अस्पताल के मुख्य गेट पर पहुंचते ही लक्ष्मी को प्रसव पीड़ा हुई और गेट पर ही डिलीवरी हो गयी. आनन-फानन में परिजनों ने जच्चा-बच्चा को अस्पताल के वार्ड में भर्ती कराया. इस दौरान बच्चे के जन्म के बाद प्रसूता का रक्तस्राव जारी था. ड्यूटी पर कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे.
नर्स की देख-रेख में रूबी को अस्पताल में भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन परिजनों के काफी गुहार के बाद भी इलाज के लिए एक भी डॉक्टर नहीं आये. इस परिस्थिति के बाद भी नर्स ने डॉक्टर को बुलाना उचित नहीं समझा. सुबह में भी लापरवाही बरती गयी. रविवार की सुबह लगभग 9.30 नौ बजे डाॅ सर्जना वार्ड में पहुंचीं और बेहोशी की हालत देख रूबी की जांच की गयी. जांच हो ही रही थी कि सुबह 10.40 बजे रूबी ने दम तोड़ दिया.
इलाज में लापरवाही से हुई बेटी की मौत : पिता : रूबी की मौत के बाद परिजनों ने लोगों से न्याय की गुहार लगायी और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. परिजनों का आरोप था कि यदि रात में ही रूबी की इलाज हुई होती तो रूबी की मौत नहीं होती. पिता दुखहरण तुरी ने बताया कि रूबी की गोतनी रेखा देवी और सास रात में अस्पताल में उसके साथ थीं .
रात में स्थिति चिंताजनक देख बेटी की गोतनी व सास ने ड्यूटी पर तैनात नर्स को डॉक्टर बुलाने का काफी अनुनय-विनय किया,लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गयी. किसी ने डॉक्टर को बुलाना तक उचित नहीं समझा. नर्स का कहना था कि सुबह से पहले कोई भी डॉक्टर अस्पताल नहीं आयेगी. परिजनों ने कहा कि बेहतर इलाज नहीं मिलने के कारण ही उनकी बेटी की मौत हो गयी.
ऑन कॉल थी, नहीं आया कॉल : डाॅ सर्जना : शनिवार रात नौ बजे से रविवार को सुबह नौ बजे तक ड्यूटी पर लगायी गयी, डाॅ सर्जना कहती है कि वह पिछले 48 घंटे से लगातार ड्यूटी कर रही हैं. लेकिन उनकी ड्यूटी ऑन कॉल थी. इमरजेंसी की स्थिति में ही उन्हें नर्स के द्वारा कॉल किया जाता है. रूबी के मामले में किसी नर्स ने उन्हें कॉल नहीं किया. प्रात: जब नौ बजे उनकी ड्यूटी समाप्त होने वाली थी तो रोज की तरह वह राउंड लेने वार्ड में गयी और वहां रूबी को बेहोश पाया. यह देख उन्होंने अगले शिफ्ट की डॉक्टर डा. रेखा झा को भी बुला लिया. जांच में पाया कि मरीज का बीपी काफी बढ़ा हुआ है. जांच चल ही रहा था कि इसी दौरान उसकी मौत हो गयी.
महिला डॉक्टर की है कमी : सिविल सर्जन : इधर, सिविल सर्जन डाॅ रामरेखा प्रसाद ने फिर डॉक्टरों की कमी का रोना रोया. उनका कहना था कि सात डॉक्टरों की जगह पर मात्र तीन डॉक्टर ही सदर अस्पताल में पदस्थापित हैं. काफी मुश्किल से इन डॉक्टरों से काम लिया जा रहा है. जो संसाधन हैं, उसमें 24 घंटे भी अस्पताल को नहीं चलाया जा सकता.
श्री प्रसाद ने फिर दोहराया कि अस्पताल है और यहां जीने-मरने का सिलसिला चलता रहता है. उन्होंने कहा कि रूबी को भी डॉक्टर ने अटेंड किया है. रक्त की कमी के कारण रूबी की मौत हुई है. यह बता दें कि रूबी की मौत के पहले मरीज के परिजनों को किसी ने भी रक्त की न ही कमी बताया और न ही किसी ने रक्त की व्यवस्था करने को कहा. परिजनों का इसपर कहना था कि जब डॉक्टर ने मरीज को देखा तक नहीं, तो फिर रक्त की कमी की बात कैसे सामने आ रही है.
लाश को रोक एसडीएम ने कराया पोस्टमार्टम
रविवार को रूबी की मौत के बाद अस्पताल का माहौल गड़बड़ाता देख अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों पर लाश शीघ्र घर ले जाने का दबाव बनाया गया. परिजनों का कहना था कि रूबी की मौत इलाज में लापरवाही के कारण हुई है और वह लाश का पोस्टमार्टम कराना चाहते हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था. बताया जाता है कि शीघ्र दाह-संस्कार कराने की अस्पताल प्रबंधन की कोशिश उस वक्त नाकाम हो गयी, जब परिजनों की सूचना पर अचानक गिरिडीह की एसडीएम अस्पताल पहुंच गयीं.
रूबी के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के दबाव को देख मोबाइल पर एसडीएम विजया जाधव को पूरी घटना की सूचना दी और न्याय की गुहार लगायी. अस्पताल परिसर से लाश लेकर एंबुलेंस निकल ही रही थी कि एसडीएम ने एंबुलेंस के सामने अपनी गाड़ी खड़ी कर दी और एंबुलेंस को रुकवाया. निर्देश दिया कि लाश पोस्टमार्टम के बाद ही उनके परिजनों को सौंपा जायेगा.
परिजनों ने भी अस्पताल प्रबंधन को पोस्टमार्टम कराने का आवेदन दिया. इधर,एसडीएम ने अस्पताल से ट्रीटमेंट शीट समेत अन्य कागजात को जब्त कर लिया है और एसडीएम के निर्देश पर पोस्टमार्टम भी कराया गया. वहीं गिरिडीह नगर थाना की पुलिस ने भी फर्द बयान लेकर मामले की पड़ताल शुरू कर दी है. इधर, अस्पताल में एसडीएम काफी देर तक जमी रहीं.
एसडीएम के खिलाफ बोलने को उकसाया : बार-बार मामले को डायवर्ट करने में सफल रहे डॉक्टरों ने इस बार भी मामले को डायवर्ट करने की कोशिश की. रूबी के परिजन जब पुलिस व मीडिया के समक्ष अस्पताल प्रबंधन की मनमानी और डॉक्टरों की लापरवाही की बात बता रहे थे तो उन्हें एसडीएम के खिलाफ भी बोलने के लिए उकसाया जा रहा था. मृतका रूबी देवी के रिश्तेदार प्रदीप तुरी ने बताया कि उन्हें डाॅ बीएन झा नामक डॉक्टर ने यह बोलने के लिए दबाव बनाया था कि एसडीएम के दबाव में उन्होंने पोस्टमार्टम कराया है. प्रदीप का कहना था कि उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से पोस्टमार्टम के लिए काफी अनुरोध किया. लेकिन मामले को रफा-दफा करने के लिए अस्पताल के कर्मी चाहते थे कि लाश का शीघ्र ही दाह संस्कार करा दिया जाये. उन्होंने कहा कि रूबी के पिता ने प्राथमिकी भी दर्ज करायी है. उन्हें उम्मीद है कि न्याय मिलेगा.
लक्ष्मी का इलाज करने से भी कर दिया था इनकार
गिरिडीह : 10 जुलाई अनिता देवी की मौत के बाद 12 जुलाई की रात को जिस गर्भवती महिला को गिरिडीह सदर अस्पताल ने रेफर कर दिया था, उसकी नॉर्मल डिलिवरी एक निजी क्लिनिक में भर्ती होने के दस मिनट बाद ही हो गयी. 12 जुलाई को शाम जमुआ के चरघरा की लक्ष्मी देवी को डिलिवरी के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रात लगभग नौ बजे डाॅ बबली जया मुर्मू ने इलाज के बाद परिजनों को बताया कि रक्त की कमी है, रक्त की व्यवस्था करें. लक्ष्मी देवी के पति छोटेलाल दास ने बताया कि रक्त की व्यवस्था करने के बाद डाॅ बबली जया मुर्मू ने इलाज करने से इनकार कर दिया और कहा कि प्रसूता की स्थिति गंभीर है. वे धनबाद में इलाज करा लें. छोटेलाल ने बताया कि काफी रात होने के साथ-साथ अपनी आर्थिक तंगी का रोना रोया और मरीज की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने को तैयार भी हो गया. इसके बाद भी डाॅ मुर्मू कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुई और मरीज को रेफर कर दिया. रात में ही लक्ष्मी को बोकारो के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां भर्ती होने के दस मिनट बाद ही नॉर्मल डिलिवरी हुई. फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों ठीक है. पर ईंट ढोनेवाले इस मजदूर परिवार को बोकारो जाने, वापस आने और अस्पताल के साथ-साथ दो दिनों तक बाहर रहने के लिए कुल मिलाकर लगभग 35 हजार रुपये खर्च करने पड़े.
