गढ़वा में मोबाइल रखने को लेकर भिड़ीं दो महिलाएं, पत्थर लगने से एक गंभीर

गढ़वा में मोबाइल को लेकर दो महिलाओं के बीच हुई हिंसक झड़प, पत्थर लगने से महिला और उसका बेटा घायल। सदर अस्पताल में चल रहा है इलाज। जानें पूरी घटना की जानकारी।

गढ़वा. गांव में मंगलवार को मोबाइल को लेकर शुरू हुआ विवाद दो महिलाओं के बीच मारपीट में बदल गया. इस दौरान पत्थर लगने से बरती देवी गंभीर रूप से घायल हो गयीं. बीच-बचाव करने पहुंचे उनके 10 वर्षीय पुत्र रितेश कुमार को भी चोट लगी. बरती देवी का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है.

बताया गया कि बरती देवी की चचेरी गोतनी रीना देवी की 18 वर्षीय बेटी को हूर गांव निवासी सकेंद्र चौधरी ने मोबाइल दिया था. रीना की बेटी उक्त मोबाइल बरती देवी की 15 वर्षीय बेटी को रखने के लिए दे रही थी, लेकिन उसने मोबाइल लेने से इनकार कर दिया. इसी बात को लेकर दोनों लडकियों के बीच नोकझोंक शुरू हो गयी.

विवाद की जानकारी मिलने के बाद दोनों की मां भी आमने-सामने आ गयीं. कहासुनी के बाद दोनों के बीच मारपीट शुरू हो गयी. बरती देवी का आरोप है कि इसी दौरान रीना देवी ने पत्थर से हमला कर उन्हें घायल कर दिया. मां को बचाने पहुंचे रितेश कुमार को भी चोट लगी.

घटना के बाद परिजन बरती देवी को इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज चल रहा है. मामले की जानकारी पुलिस को दी गयी है. पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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