तहले में मानव-हाथी द्वंद्व को लेकर जागरूकता बैठक, डीएफओ ने बताये बचाव और मुआवजे के तरीके

चिनिया रंका में वन विभाग ने मानव-हाथी द्वंद्व को लेकर जागरूकता बैठक की। ग्रामीणों को बचाव के उपाय और मुआवजे की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

चिनिया, गढ़वा: चिनिया पश्चिमी वन प्रक्षेत्र के तहले गांव में रविवार को वन विभाग की ओर से मानव-हाथी द्वंद्व को लेकर जागरूकता बैठक आयोजित की गयी. वन प्रमंडल पदाधिकारी एबिन बेनी अब्राहम ने ग्रामीणों को हाथियों से बचाव के उपायों की जानकारी दी. साथ ही हाथियों से फसल और अन्य क्षति होने पर मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया भी समझायी.

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में सोलर फेंसिंग की व्यवस्था कराने की मांग रखी. डीएफओ ने ग्रामीणों की मांग को उच्चाधिकारियों के समक्ष रखने तथा आवश्यक आवंटन के लिए कार्रवाई का आश्वासन दिया. उन्होंने बताया कि हाथियों से प्रभावित कई लोगों के मुआवजा भुगतान का आदेश जारी हो चुका है. आवंटन प्राप्त होते ही संबंधित लोगों को भुगतान किया जायेगा.

हाथियों से दूरी बनाये रखने की अपील

वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि आबादी क्षेत्र में हाथियों के पहुंचने पर तत्काल विभाग को सूचना दें. साथ ही हाथियों को सुरक्षित तरीके से हटाने के दौरान वनकर्मियों का सहयोग करें. अधिकारियों ने ग्रामीणों से हाथियों को उकसाने या उनके करीब जाने से बचने की भी अपील की.

मौके पर मुखियापति चरकु परहिया, वन समिति अध्यक्ष रामप्रताप यादव, अजय कोरवा, महेंद्र परहिया समेत चफला, तांडील, सिंगसिंगा कला और तहले के ग्रामीण एवं वनकर्मी मौजूद थे.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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