भाप में पका महुआ खाने को विवश है आदिवासी परिवार

भाप में पका महुआ खाने को विवश है आदिवासी परिवार

रमकंडा/भंडरिया.

गढ़वा जिले के भंडरिया प्रखंड के एक आदिवासी परिवार के घर में खाने के लिए अनाज का दाना तक नहीं है. इन दिनों पूूरा परिवार भाप में पका महुआ खाकर पूरा जिंदगी गुजार रहा है. स्थिति ऐसी है की बिलिचदान तिर्की के नवजात बच्चे को दूध तक मयस्सर नही है. मुहल्ले के लोगों का दिया बिस्कुट पानी में घोलकर बच्चे को दूध की जगह पिलाया जा रहा है. यह दुर्दशा भंडरिया प्रखंड के सुकृत पेट्रोल पंप के बगल में रहने वाले बायाखुरा गांव निवासी बिलिचदान तिर्की के परिवार की है. दरअसल बिलिचदान तिर्की की पत्नी शबनम तिर्की की मौत तालाब में डूबने से हो गयी. कुछ माह पहले ही शबनम ने एक बच्चे को जन्म दिया था. इधर इस घटना के बाद पूरे परिवार पर दु:ख का पहाड़ टूट पड़ा है. घर में बूढ़ी मां तथा तीन बच्चों व एक नवजात की जिम्मेवारी ने बिलिच्दान को विकट परिस्थिति पर लाकर खड़ा कर दिया है. इधर घर में अनाज का एक दाना तक नहीं है. तालाब में डूबने से पत्नी की मौत के बाद मृतक के आश्रित को मुआवजा भी नहीं मिला है. जबकि पत्नी की मौत को करीब पांच महीने बीत चुके हैं.

राशन कार्ड है लेकिन महीनों से अनाज नही मिलाबिलिच्दान तिर्की सहित मुहल्ले के लोगों ने बताया कि उसके पास राशन कार्ड भी है. लेकिन महीनों से उसे राशन तक नहीं मिला है. स्थानीय मुखिया ने अनाज दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन उस परिवार को अनाज नहीं मिल पाया. बिलिच्दान बताते हैं कि थोड़ी बहुत मजदूरी करके बच्चों का पेट पाल लेते थे. लेकिन पत्नी की मौत के बाद तीन बच्चों सहित नवजात को देखना काफी मुश्किल काम है. ऐसे में वह कहीं मजदूरी करने भी नहीं जा सकता. घर में बूढी मां भी है.

बच्चे लाते हैं महुआ : इन दिनों महुआ का सीजन चल रहा है तो बच्चे कुछ महुआ चुनकर लाते हैं. उसे ही भाप में पकाकर इन दिनों पूरा परिवार खा रहा है. बुधवार को देखा गया की बिलिच्दान के घर में चना के साथ महुआ भापकर बर्तन में रखा हुआ था. एक ग्रामीण ने बताया की कभी-कभी उनकी और से भी सहयोग किया जाता है.

आपूर्ति पदाधिकारी से बात कर जानकारी लेंगे : एसडीओइस संबंध में पूछे जाने पर रंका अनुमंडल पदाधिकारी रूद्र प्रताप ने कहा कि वह आपूर्ति पदाधिकारी से बात कर मामले की जानकारी लेंगे. संबंधित परिवार को सभी तरह की सरकारी सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेगी.

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