गढ़वा. जनजातीय शिल्पकारों और कारीगरों को पहचान, बाजार और बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ट्राइफेड, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से सोमवार को टाउन हॉल में जनजातीय शिल्पकार पंजीकरण मेला लगाया गया. मेले में गढ़वा और आसपास के जिलों से 226 जनजातीय शिल्पकारों और कारीगरों ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्र ने किया.
जनजातीय कला और शिल्प हमारी सांस्कृतिक विरासत
इस अवसर पर ट्राइफेड के क्षेत्रीय प्रबंधक राज कुमार, जिला कल्याण पदाधिकारी देवानंद राम, डीपीएम जेएसएलपीएस बिमलेश शुक्ला और प्रशांत कुमार मिश्र मौजूद थे. उपायुक्त ने शिल्पकारों के पारंपरिक हस्तशिल्प और अन्य उत्पादों की सराहना की. उन्होंने कहा कि जनजातीय कला और शिल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. ऐसे जनजातीय कला और शिल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आयोजनों से शिल्पकारों को पहचान के साथ बाजार और आय के बेहतर अवसर मिलेंगे.
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आर्थिक रूप से सशक्त करना कार्यक्रम का उद्देश्य
ट्राइफेड के क्षेत्रीय प्रबंधक राजकुमार ने कहा कि पारंपरिक ज्ञान, कला और कौशल को बाजार से जोड़कर जनजातीय समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त करना कार्यक्रम का उद्देश्य है. मेले में बांस की डलिया, टोकरियां, चटाइयां, प्राकृतिक रेशों के उत्पाद, लकड़ी के घरेलू सामान, लाख के आभूषण, सजावटी सामग्री, पारंपरिक आभूषण, सिल्क और कपास के वस्त्र तथा हस्तकरघा उत्पाद प्रदर्शित किए गए. ट्राइफेड और जेएसएस की टीम ने शिल्पकारों के दस्तावेज, उत्पाद और शिल्प कौशल से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी की.
