जुगाड़ तंत्र का कमाल, घूम-फिरकर जिला मुख्यालय में ही काट रहे सेवा कर्मी

गढ़वा जिले में सरकारी कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति तंत्र इस कदर हावी हो चुका है कि कई कर्मचारी वर्षों से जिला मुख्यालय में ही सेवा दे रहे हैं

पीयूष तिवारी, गढ़वा गढ़वा जिले में सरकारी कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति तंत्र इस कदर हावी हो चुका है कि कई कर्मचारी वर्षों से जिला मुख्यालय में ही सेवा दे रहे हैं. नियम के अनुसार प्रत्येक तीन वर्षों में कर्मियों का स्थानांतरण अनिवार्य है, लेकिन कुछ ने इसे जुगाड़ प्रणाली से धता बता दिया है. जिला मुख्यालय स्थित विभिन्न विभागों में कई कर्मचारी वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे हुए हैं. इधर हाल ही में चार प्रशासी अधिकारी, 13 प्रधान लिपिक, तीन उच्च वर्गीय लिपिक और सात निम्नवर्गीय लिपिकों का स्थानांतरण दूरस्थ प्रखंड व अंचलों में किया गया, लेकिन फाइलों में नाम बदलने के बाद भी उनकी प्रतिनियुक्ति पुराने विभागों में ही हो गयी. दूसरे कर्मियों को नहीं मिल रहा मौका वहीं दूसरी ओर, सुदूरवर्ती क्षेत्रों में पदस्थापित कर्मचारी जिला मुख्यालय में कुछ समय तक काम करना चाहते हैं, ताकि वे भी विभागीय कार्यों को समझ सकें. लेकिन, उन्हें मौका नहीं मिल पा रहा है. क्योंकि मुख्यालय की कुर्सियां वर्षों से कुछ खास कर्मियों के ही नाम से आरक्षित जैसी हो गयी है. 144 कर्मी वर्षों से जमे हुए एक ही विभाग में सरकारी नियमों के अनुसार हर तीन साल में कर्मियों का स्थानांतरण जरूरी है, लेकिन गढ़वा जिले में 144 ऐसे कर्मचारी हैं, जो वर्षों से एक ही विभाग में कार्यरत हैं. इसी वर्ष जनवरी में 27 कर्मियों का स्थानांतरण किया गया था, लेकिन इनमें से 24 की प्रतिनियुक्ति फिर से उसी विभाग या मुख्यालय के दूसरे विभागों में कर दी गयी. 1 कार्यालय अधीक्षक 20 प्रधान लिपिक 40 उच्च वर्गीय लिपिक 38 निम्नवर्गीय लिपिक 45 राजस्व कर्मचारी प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल स्थानीय कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या नियम सिर्फ कुछ कर्मियों पर ही लागू होते हैं. अगर नहीं, तो फिर वर्षों से एक ही स्थान पर जमे लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही. इस पूरे मामले में प्रशासनिक चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है.

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Published by: Deepak

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