घनश्याम सोनी, बड़गड़ बड़गड़ प्रखंड के आदिवासी बहुल क्षेत्र से बैंकिंग व्यवस्था की एक बेहद संवेदनशील और पीड़ादायक तस्वीर सामने आयी है. झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक की बड़गड़ शाखा में केवाइसी अपडेट कराने के नाम पर एक बीमार और लाचार आदिवासी वृद्ध दंपती को तीन महीने तक परेशान होना पड़ा. मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने और बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद बैंक प्रबंधन हरकत में आया. महुआटिकर गांव निवासी रेपा लकड़ा (73 वर्ष) और उनके पति रतन लकड़ा (75 वर्ष) बैंक के खाताधारक हैं. दोनों वृद्धावस्था और बीमारी के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हैं. मार्च में उनकी बहू फुलमनी लकड़ा किसी तरह उन्हें बैंक लेकर पहुंची थी, ताकि केवाइसी अपडेट हो सके और खाते में रुकी पेंशन व इलाज के लिए राशि निकाली जा सके. आरोप है कि बुजुर्ग बैंक की सीढ़ियां नहीं चढ़ सके तो शाखा प्रबंधक से नीचे आने का अनुरोध किया गया, लेकिन उन्हें मदद मिलने के बजाय निराशा हाथ लगी. परिजनों का आरोप है कि बाद में बैंक ने जमा किये गये दस्तावेजों के भी गुम होने की बात कही. कई बार प्रयास और शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं हुआ. अंततः मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद नौ जून को बैंक कर्मी वृद्ध के घर पहुंचे और बिस्तर पर ही अंगूठा लगवाकर केवाइसी प्रक्रिया पूरी की. ……………. शाखा प्रबंधक अवकाश पर हैं. बुजुर्ग दंपती के खातों का केवाइसी कार्य पूरा कर दिया गया है. बैंक आने पर उनके खाते से राशि की निकासी तत्काल करा दी जायेगी. बैंक प्रबंधक (कार्यवाहक), जेआरजीबी बड़गड़
तीन महीने तक पेंशन के लिए तरसता रहा बीमार आदिवासी दंपती
तीन महीने तक पेंशन के लिए तरसता रहा बीमार आदिवासी दंपती
