गढ़वा के श्री राम लला मंदिर की है चमत्कारी महिमा

दो बार मंदिर से हो चुकी है मूर्ति की चोरी, दोनों बार मूर्ति वापस मिली

दो बार मंदिर से हो चुकी है मूर्ति की चोरी, दोनों बार मूर्ति वापस मिली प्रतिनिधि, गढ़वा रामनवमी के अवसर पर भगवान श्री राम के बाल रूप के दर्शन न केवल शुभ होते हैं बल्कि सभी अनिष्ट दूर करने वाले भी होते हैं. झारखंड के गढ़वा जिला मुख्यालय के स्टेशन रोड सोनपुरवा में स्थित श्री राम लला मंदिर में भगवान श्री राम इसी बाल रूप में विराजमान हैं. 1880 में स्थापित यह मंदिर गढ़वा का सबसे प्राचीन मंदिर है. किवंदतियों के अनुसार, मंदिर के स्थान पर पहले एक ब्रह्मचारी तपस्या में लीन रहते थे. एक दिन रामलला नामक बच्चे का असामयिक निधन हुआ, लेकिन ब्रह्मचारी ने मंदिर की मिट्टी से मृत बच्चे को जीवित कर दिया. बाद में गढ़वा के राजा कालीचरण सिंह ने अष्टधातु से निर्मित बाल रामलला की प्रतिमा स्थापित कर मंदिर की स्थापना की. मंदिर की प्रतिमा दो बार चोरी हुई, लेकिन प्रतिमा दोनों बार वापस लौट आयी. 2012 में प्रतिमा झारखंड के रामगढ़ से बरामद की गयी और गढ़वा के राम भक्तों ने पालकी यात्रा के साथ पुनः मंदिर में स्थापित किया. 2016 में नयी समिति गठित हुई और भव्य मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हुआ . 7500 वर्ग फीट में दो मंजिला मंदिर का निर्माण हुआ, जिसमें प्रथम तल पर 2020 में भगवान की स्थापना की गयी. मंदिर परिसर में श्री हनुमान और श्री शंकर के मंदिर भी बनाये गये और चारदीवारी कर अतिक्रमण मुक्त कराया गया. मंदिर को हिंदू समाज का बड़ा केंद्र बनाने की योजना मंदिर कमेटी के सचिव धनंजय का कि मंदिर परिसर को हिंदू समाज का बड़ा केंद्र बनाने की योजना है. यह मंदिर धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनेगा. यहां बड़ा विवाह मंडप बनेगा. यहां प्रखर कर्मकांडी तैयार करने की भी योजना है. हर वर्ष होता है रामनवमी महोत्सव, भक्तों की उमड़ती है जनसैलाब श्री राम लला मंदिर में प्रतिवर्ष चैती नवरात्रा को नौ दिनों का श्री रामनवमी महोत्सव मनाया जाता है. इसके तहत विधिवत पूजा पाठ किया जाता है. दिन में मानस पाठ एवं शाम में प्रवचन का कार्यक्रम होता है. अष्टमी के दिन महा आरती का आयोजन होता है. जिसमें विशिष्ट जनों को आमंत्रित किया जाता है. वहीं नवमी के दिन भव्य मेला का आयोजन होता है. इस दिन गढ़वा शहर एवं उसके आसपास के सारे अखाड़े जुलूस का मिलन मंदिर परिसर में होता है.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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