रामकथा के मार्मिक प्रसंगों से भाव-विभोर हुए श्रोता
गढ़वा के नरगिर आश्रम में चैत्र नवरात्र के अवसर पर नवाह परायण सह रामकथा अमृत वर्षा कार्यक्रम के सातवें दिन अयोध्या से आये कथावाचक पूज्य संत बालस्वामी प्रपन्नाचार्य ने रामकथा के अनेक मार्मिक प्रसंगों का वर्णन कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया. संत प्रपन्नाचार्य ने कहा कि रामकथा त्याग, प्रेम, बलिदान और समर्पण की अद्भुत गाथा है. उन्होंने केवट प्रसंग का उदाहरण देते हुए बताया कि केवट भले ही एक साधारण मल्लाह था, लेकिन उसकी सच्ची भक्ति और प्रेम ने प्रभु श्रीराम को भी उसकी बात मानने पर मजबूर कर दिया. केवट ने प्रभु के चरण धोने की जिद की और कहा कि उनके चरणों की धूल में पत्थर को भी नारी बनाने की शक्ति है, इसलिए उसकी नाव भी नारी न बन जाए, जो उसकी जीविका का एकमात्र साधन है . केवट ने चरण धोकर चरणामृत ग्रहण किया और अपने साथ कई पीढ़ियों का उद्धार किया . संत ने आगे भगवान राम के चित्रकूट गमन का वर्णन किया, जहां उन्होंने भारद्वाज मुनि और महर्षि वाल्मीकि से भेंट की थी . चित्रकूट कामदगिरी पर्वत, रामघाट और गुप्त गोदावरी जैसी पौराणिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है . भरत चरित्र का उल्लेख करते हुए संत ने कहा कि भरत त्याग, निस्वार्थ प्रेम और धर्मपरायणता का प्रतीक हैं. माता कैकेयी ने राम को वनवास भेजा और भरत के लिए राज्य मांगा, फिर भी भरत ने सिंहासन ठुकराया और राम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर रख 14 वर्षों तक राज्य संभाला. संत ने संदेश दिया कि जीवन में हानि से घबराना नहीं चाहिए और लाभ मिलने पर लोभ से बचना चाहिए . निष्काम भाव से की गई भक्ति सर्वोत्तम होती है. कार्यक्रम के अंत में रामकथा समिति के अध्यक्ष चंदन जायसवाल ने श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि आप सभी के स्नेह से लगातार पांचवीं बार यह कथा सफलतापूर्वक आयोजित हो सकी है .
