गढ़वा. गढ़वा के रमकंडा प्रखंड क्षेत्र में शुक्रवार और शनिवार को हुई भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया. लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर जलजमाव, सड़क क्षतिग्रस्त होने, पुलिया का छलका बहने और खेतों में पानी भरने की स्थिति उत्पन्न हो गई. हालांकि रविवार तक बारिश थमने और स्थिति सामान्य होने से लोगों ने कुछ राहत की सांस ली है. इधर, बारिश से हुए नुकसान के कारण ग्रामीणों के सामने कई तरह की परेशानियां खड़ी हो गई हैं.
पुलिया पर बना छलका क्षतिग्रस्त
सबसे अधिक परेशानी रमकंडा प्रखंड के उदयपुर पंचायत स्थित गेडुड़ा टोला के ग्रामीणों को उठानी पड़ रही है. यहां पुलिया पर बना छलका पानी के तेज बहाव में बह गया. छलका के बह जाने के साथ ही पुलिया के दोनों तरफ की मिट्टी का भी बड़े पैमाने पर कटाव हुआ है. इससे इस मार्ग पर लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है. ग्रामीणों के अनुसार शुक्रवार व शनिवार को हुई तेज बारिश के बाद गेडुड़ा स्थित पुलिया के ऊपर से पानी का तेज बहाव शुरू हो गया था. पानी का दबाव बढ़ने के कारण पुलिया पर बना छलका क्षतिग्रस्त होकर बह गया. वहीं, पानी के तेज बहाव से दोनों ओर की मिट्टी भी कटकर बह गई. इसके कारण सड़क और पुलिया के बीच गहरी खाई जैसी स्थिति बन गई है. वर्तमान में इस रास्ते से पैदल चलना और दोपहिया वाहन लेकर गुजरना भी मुश्किल हो गया है.
आवागमन का साधन है यह मार्ग
ग्रामीणों ने रविवार की सुबह करीब नौ बजे घटना की जानकारी देते हुए बताया कि गेडुड़ा के लोगों के लिए यह मार्ग मुख्य आवागमन का साधन है. आसपास के कई घरों और टोले के लोग इसी रास्ते से मुख्य मार्ग तक पहुंचते हैं. रास्ता बाधित होने के कारण ग्रामीणों को अब दूसरे रास्ते का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी. ग्रामीण भिखारी पांडेय, नारद पांडेय, रामगृह पांडेय, लव पांडेय, राजा पांडेय सहित अन्य लोगों ने बताया कि छलका बह जाने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है.
सबसे ज्यादा चिंता मरीजों को
सबसे ज्यादा चिंता मरीजों और आपात स्थिति को लेकर है. ग्रामीणों का कहना है कि किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत खराब होने या गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाने की स्थिति में इस रास्ते से वाहन ले जाना संभव नहीं होगा. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल क्षतिग्रस्त छलका की मरम्मत कराने और आवागमन बहाल करने की मांग की है. ये भी पढ़ें: पलामू संसदीय क्षेत्र को रेलवे की सौगात: शेरघाटी-कजरी नई रेल लाइन को रेलवे बोर्ड की मंजूरी, ₹2,627 करोड़ होंगे खर्च
कस्तूरबा विद्यालय में घुटने तक भरा पानी
इधर, शुक्रवार और शनिवार को हुई भारी बारिश के कारण रमकंडा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय परिसर में घुटने तक पानी भर गया था. विद्यालय परिसर में पानी जमा होने से छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. इसकी सूचना मिलने के बाद विभागीय अधिकारी विद्यालय पहुंचे और जलजमाव की स्थिति का जायजा लिया. इसके बाद मोटर पंप लगाकर विद्यालय परिसर से पानी निकालने का काम कराया गया. पानी निकलने के बाद विद्यालय परिसर की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई .
बांध टूटने से धान की फसल को नुकसान
भारी बारिश का असर क्षेत्र के खेतों पर भी पड़ा है. बारिश के कारण स्कूलीया बांध टूट गया, जिससे आसपास के खेतों में पानी भर गया. खेतों में पानी जमा होने से धान की फसल को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है. किसानों का कहना है कि लगातार बारिश और बांध टूटने के कारण खेतों में पानी का जमाव बढ़ गया, जिससे तैयार हो रही धान की फसल प्रभावित हुई है। किसानों ने प्रशासन से नुकसान का जायजा लेकर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है.
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मकान की दीवार गिरी
वहीं, रमकंडा प्रखंड के मुड़खुड़ गांव में भारी बारिश के कारण अजीज अंसारी के घर की एक तरफ की दीवार पानी के दबाव में गिर गई. दीवार गिरने से परिवार को नुकसान हुआ है. गनीमत रही कि घटना के दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. अजीज अंसारी ने शनिवार सुबह जिला प्रशासन से आपदा प्रबंधन के तहत क्षति का आकलन कर मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है.
प्रभावित इलाकों का सर्वे कराने की मांग
लगातार हुई बारिश से प्रखंड क्षेत्र में हुए नुकसान के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित इलाकों का सर्वे कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर सड़क, पुलिया, खेत और मकानों को नुकसान पहुंचा है. ऐसे में संबंधित विभाग की टीम द्वारा स्थल निरीक्षण कर क्षति का आकलन किया जाना जरूरी है, ताकि प्रभावित लोगों को समय पर राहत और आवश्यक सहायता मिल सके.
