सिंदुरिया की दो जलमीनार दो साल से खराब, बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे लोग

सिंदुरिया की दो जलमीनार दो साल से खराब, बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे लोग

विजय सिंह, भवनाथपुर

सिंदुरिया पंचायत की झोपड़ी कॉलोनी और गुड़गांवा स्कूल के पास रहने वाले ग्रामीणों के लिए भीषण गर्मी में जीवन मुश्किल हो गया है. इन दोनों महत्वपूर्ण स्थलों पर लगायी गयी जलमीनारें पिछले दो वर्षों से तकनीकी खराबी के कारण पूरी तरह से निष्क्रिय हैं. जलमीनार ठप होने से करीब 200 लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का इस समस्या से कोई सरोकार नहीं है. ग्रामीणों में व्यवस्था के खिलाफ गहरा आक्रोश है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सात वर्ष पूर्व एसएसी मद से गुड़गांवा स्कूल और सीआइएसएफ बैरक (वर्तमान में होमगार्ड बैरक) के सामने झोपड़ी कॉलोनी में जलमीनार का निर्माण कराया गया था. शुरुआत में जलापूर्ति ठीक थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से रख-रखाव के अभाव में दोनों जलमीनारें खराब पड़ी हैं. इस जलमीनार पर आश्रित करीब 200 लोग अब पीने के पानी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. जल संकट का सबसे दुखद पहलू यह है कि घर की महिलाएं और युवतियां सबसे अधिक प्रभावित हैं. पीने का पानी तो लोग दूर-दराज से लाकर निकाल लेते हैं, लेकिन नहाने, कपड़े धोने और मवेशियों के लिए उन्हें बगल की नदी में जाना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि इस तपती गर्मी में पानी के बिना जीवन नर्क बन गया है. सबसे ज्यादा ठेस महिलाओं के आत्मसम्मान को पहुंच रही है, जिन्हें खुले आसमान के नीचे नदी के घाट पर नहाना और कपड़े धोना पड़ता है, फिर भी शासन-प्रशासन की नींद नहीं टूट रही.

अधिकारियों से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई ग्रामीणों ने बताया कि पांच माह पहले प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर जलमीनार मरम्मत की मांग की थी, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. पंचायत समिति सदस्य संजू देवी ने भी बीडीओ को कई बार अवगत कराया, लेकिन बात नहीं बनी. दस दिन पहले प्रखंड मुख्यालय में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सहायक अभियंता और बीडीओ की मौजूदगी में बैठक हुई, जिसमें जलमीनारों का मुद्दा उठाया गया. विभाग के सहायक अभियंता ने कहा था कि बहुत जल्द प्राक्कलन तैयार कर मरम्मत कर दी जायेगी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. थक-हारकर ग्रामीणों ने विधायक अनंत प्रताप देव से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है और अनुरोध किया है कि जलमीनारें अविलंब चालू करायी जाएं, ताकि भीषण गर्मी में राहत मिल सके.

क्या कहते हैं लोग

पानी के बिना जीना मुहाल: फगुनी देवी

फगुनी देवी ने कहा कि पानी के बिना बहुत परेशानी हो रही है. हम पंचायत से लेकर प्रखंड कार्यालय तक चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन कोई हमारी सुध लेने वाला नहीं है. अब तो नदी के पानी के सहारे ही जीवित हैं.

दो साल से सिर्फ आश्वासन: रीता देवी

रीता देवी ने कहा कि गांव में पानी की गंभीर समस्या है. पिछले दो वर्षों से जलमीनार कबाड़ में तब्दील हो चुकी है. हर तरफ भटकना पड़ता है, लेकिन हमारी पीड़ा सुनने वाला कोई तंत्र नहीं बचा.

नहाने-धोने के लिए नदी ही सहारा: रजनी देवी

रजनी देवी ने कहा कि भयानक गर्मी में पीने का पानी तो हम कहीं से कर लेते हैं, लेकिन घरेलू काम-काज और नहाने के लिए मजबूरी में नदी जाना पड़ता है, जो बेहद कष्टदायक है.

गंभीर समस्या से जूझ रहे ग्रामीण: फुलवा देवी

फुलवा देवी ने कहा कि हम लोग पानी की भीषण किल्लत से जूझ रहे हैं. दो साल से खराबी की शिकायत की जा रही है, पर कोई सुनवाई नहीं है. यदि नदी न हो, तो हमारा जीवन ठप हो जायेगा.

जल्द ही समस्या का समाधान किया जायेगा: बीडीओ

भवनाथपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी नंदजी राम ने कहा कि ग्रामीणों के माध्यम से पेयजल संकट की जानकारी मिली है.जल्द ही समस्या का समाधान किया जायेगा. इस दिशा में सक्रियता के साथ कार्य किया जा रहा है.

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लेखक के बारे में

Author: Akarsh Aniket

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