सरस्वती नदी बचाने में युवा अभिषेक का संघर्ष बन रहा जन-आंदोलन

सरस्वती नदी बचाने में युवा अभिषेक का संघर्ष बन रहा जन-आंदोलन

प्रतिनिधि, गढ़वा गढ़वा जिले की ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर सरस्वती नदी को बचाने के लिए युवा अभिषेक भारद्वाज द्वारा शुरू किया गया आंदोलन अब एक बड़े जन-अभियान का रूप ले रहा है. शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले रंका मोड़ पर भीषण गर्मी और तेज धूप की परवाह किये बिना अभिषेक कई दिनों से हाथों में तख्ती लेकर खड़े हैं. उनका यह आंदोलन शहरवासियों को अपनी जीवनदायिनी सरस्वती नदी के प्रति जागरूक करने और इसके अस्तित्व को बचाने के लिए है. अभिषेक का सीधा आरोप है कि शासन और प्रशासन नदी को बचाने में गंभीर नहीं हैं, जिसके कारण प्राकृतिक धरोहर खतरे में है. उन्होंने जिले के उपायुक्त से भी सरस्वती नदी को बचाने की गुहार लगायी है.

अभिषेक के इस निस्वार्थ और अकेले शुरू किये गये संघर्ष की गूंज अब सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में भी सुनायी देने लगी है. नदी बचाने की इस मुहिम की गंभीरता को देखते हुए समाज के विभिन्न वर्गों और राजनीतिक-सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिलने लगा है, जिससे इसके दायरे का विस्तार हो रहा है.

पूर्व मंत्री ने दिया समर्थन

पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने इस आंदोलन की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर इसका पूर्ण समर्थन किया है. उन्होंने इसे समाज के लिए प्रेरणादायी कदम बताया. पूर्व मंत्री ने कहा कि इस तपती धूप और भीषण गर्मी में जिस समर्पण के साथ अभिषेक सड़क पर खड़े होकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं, वह बेहद सराहनीय है. वे लोगों को जल संरक्षण, नदी बचाने और पर्यावरण के प्रति सचेत कर रहे हैं, जो आज समाज के लिए सकारात्मक संदेश है. उन्होंने गढ़वा शहरवासियों से अपील की कि सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के इस प्रयास में सभी लोग अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें.

करणी सेना का मिला सक्रिय समर्थन

सरस्वती नदी बचाने की इस मुहिम में भारत करणी सेना की गढ़वा जिला युवा इकाई ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर इसमें शामिल होने और सक्रिय समर्थन देने की घोषणा की. युवा जिलाध्यक्ष शुभम सिंह ने कहा कि सरस्वती नदी सिर्फ जलस्रोत नहीं बल्कि गढ़वा की पहचान और संस्कृति का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन उदासीन है, तो युवाओं को खुद आगे आकर समाज के साथ मिलकर नदी बचाने की पहल करनी होगी. करणी सेना इस अभियान को आगे बढ़ाने में हर संभव सहयोग करेगी.

अकेले शुरू हुआ आंदोलन अब बन रहा जन-आंदोलन

गढ़वा शहर की जीवनदायिनी सरस्वती नदी आज प्रशासनिक उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. ऐसे समय में अभिषेक भारद्वाज का रंका मोड़ पर अकेले तख्ती लेकर खड़ा होना शहर के सोये हुए जमीर को जगाने जैसा है. भीषण गर्मी की परवाह किए बिना शुरू हुआ यह ””””एकल मार्च”””” अब रंग ला रहा है. पहले आम जनता, फिर पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर का नैतिक समर्थन, आजसू के जिला अध्यक्ष दीपक शर्मा और भारत करणी सेना युवा इकाई का जुड़ना, साथ ही सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स का सहयोग, यह साबित करता है कि अभिषेक की यह गूंज अब सिर्फ रंका मोड़ तक सीमित नहीं रही. युवाओं और समाज का यह जुटान संकेत है कि सरस्वती नदी को बचाने का यह संघर्ष आने वाले दिनों में गढ़वा की सड़कों पर एक बड़ा जन-आंदोलन बनकर उभरेगा.

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Author: Akarsh Aniket

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