गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट
Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक समृद्धि और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की गई है. गढ़वा जिले की हर पंचायत में अब दुग्ध उत्पादक सहयोग समिति का गठन किया जाएगा. उपायुक्त अनन्य मित्तल की अध्यक्षता में हुई जिला सहकारिता विकास समिति की छठी बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है. इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पशुपालकों की आय में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होगी.
जिले में पहले से सक्रिय हैं 15 दुग्ध समितियां
बैठक में गव्य विकास और डेयरी से जुड़े अधिकारियों ने जिले की मौजूदा स्थिति की जानकारी साझा की बताया कि वर्तमान में गढ़वा जिले में कुल 15 दुग्ध उत्पादक समितियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. मेधा डेयरी के प्रतिनिधि ने बताया कि जिले में अभी 75 मिल्क पोलिंग पॉइंट संचालित हैं, जिन्हें और विस्तार दिया जाएगा. डीसी मित्तल ने निर्देश दिया कि इस दायरे को बढ़ाते हुए हर पंचायत को दुग्ध उत्पादक समिति से जोड़ा जाए, ताकि कोई भी पशुपालक दूध बेचने से वंचित न रहे.
डीसी ने दिया निर्देश
डीसी मित्तल ने निर्देश दिया कि इस दायरे को बढ़ाते हुए हर पंचायत को दुग्ध उत्पादक समिति से जोड़ा जाए, जिससे कि कोई भी पशुपालक दूध बेचने से वंचित न रहे. सहकारिता को नई गति देने के लिए सिर्फ डेयरी ही नहीं, बल्कि मत्स्य पालन और निष्क्रिय समितियों पर भी कड़ा एक्शन लिया गया है. जिले के सभी मत्स्यजीवियों की संख्या, उनकी गतिविधियों और कार्यों का एक विवरण तैयार करने का निर्देश दिया गया है. तय किया गया कि जो समितियां निष्क्रिय हैं, उन्हें बंद (परीसमापन) कर उनके स्थान पर नई क्रियाशील समितियों का गठन किया जाएगा. किसानों को नई समितियों से जोड़ने और आर्थिक गतिविधियां शुरू करने के लिए विशेष रूप से प्रेरित किया जाएगा. ग्रामीणों को बैंकिंग और डिजिटल सेवाएं उनके गांव में ही मिल सकें, इसके लिए समितियों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है. इसके तहत सभी बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों (लैंप्स/पैक्स) को झारसेवा आईडी दी जाएगी. इन समितियों में बाकायदा बैंकिंग प्रणाली लागू होगी और ‘नेशनल को-ऑपरेटिव डेटाबेस’ पर हर डेटा को अपडेट रखा जाएगा. जिला सहकारिता पदाधिकारी से सूची लेकर जिन लैंप्स और पैक्स में अब तक झारसेवा आईडी नहीं बनी है, वहां तुरंत आईडी बनाकर उसे चालू करें.
योजनाओं में पारदर्शिता पर जोर
बैठक में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई अन्य बड़े प्रस्तावों पर मुहर लगी, इसके तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए 100 और 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदामों का निर्माण कराया जाएगा. जमीन की तलाश के लिए डीसी ने संयुक्त निरीक्षण टीम गठित करने का निर्देश दिया है. किसानों की सहूलियत के लिए मिनी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला और मशीनें लगाई जाएंगी. गांवों में ही मवेशियों के इलाज के लिए पशु औषधि विक्रय केंद्र स्थापित करने पर भी मंथन हुआ. पाइप जलापूर्ति योजनाओं के ऑपरेशन और मेंटेनेंस कार्यों की भी समीक्षा की गई. उपायुक्त अनन्य मित्तल ने साफ लहजे में कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए. उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय बनाने और अगली बैठक में ‘अपडेटेड प्रोग्रेस रिपोर्ट’ के साथ आने का निर्देश दिया है.
बैठक में ये लोग रहे मौजूद
बैठक में जिला सहकारिता पदाधिकारी नीलम कुमारी, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अजय कुमार सिंह, कृषि पदाधिकारी खुशबू पासवान, मत्स्य पदाधिकारी धनराज आर. कापसे, गव्य पदाधिकारी गिरीश कुमार, डीडीएम नाबार्ड, जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी चंद्रशेखर पटेल, सीएससी मैनेजर मनीष कुमार व कौशल किशोर सहित अन्य कर्मी मौजूद थे.
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