भाजपा संगठन में गढ़वा का ''''''''डबल धमाका'''''''', पलामू के पास इकलौती बड़ी कुर्सी

प्रदेश कमेटी में पुरानी स्थिति बरकरार, भानु का ''राष्ट्रीय'' रसूख कायम

प्रदेश कमेटी में पुरानी स्थिति बरकरार, भानु का ””””राष्ट्रीय”””” रसूख कायम अविनाश, गढ़वा झारखंड प्रदेश भाजपा की सांगठनिक घोषणाओं के बाद पलामू प्रमंडल के सियासी गलियारों में ””””शक्ति संतुलन”””” को लेकर नयी बहस छिड़ गयी है. रसूख की इस जंग में फिलहाल गढ़वा का पलड़ा पलामू पर भारी नजर आ रहा है. गढ़वा जिले को प्रदेश उपाध्यक्ष के दो महत्वपूर्ण पद मिलने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा प्रतिनिधित्व मिला है, जबकि पड़ोसी पलामू जिले के पास केवल एक ही महत्वपूर्ण पद है, लेकिन वह भी संगठन में अपना असर बना रहा है. राजनीतिक जानकारों के अनुसार, पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही का संगठन में कद और प्रभाव तेजी से बढ़ा है. फायरब्रांड नेता के रूप में अपनी पहचान रखने वाले शाही ने 2019 में भाजपा में शामिल होने के बाद संगठन में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है. उनका राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व इसी बात का संकेत है कि वे पलामू प्रमंडल के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्हें भाजपा की राष्ट्रीय परिषद में जगह मिली. हाल ही में मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव में प्रभारी के रूप में शाही के कुशल चुनावी प्रबंधन ने भाजपा को मेयर पद पर अरूणा शंकर की जीत दिलायी. यह संगठन में उनके प्रभाव को और मजबूत करता है. पलामू जिले के लिए मनोज सिंह राहत और रसूख की वजह हैं. उनके पास प्रदेश महामंत्री का महत्वपूर्ण पद है, जो संगठन की रीढ़ माना जाता है. हालांकि पद केवल एक है, लेकिन यह पूरे प्रदेश के सांगठनिक कामकाज में निर्णायक भूमिका निभाता है. वहीं, गढ़वा ने संख्या बल में बढ़त बनाये रखते हुए दो प्रदेश उपाध्यक्षों की कुर्सियों पर कब्जा बरकरार रखा है. अनुभवी नेता बाल मुकुंद सहाय का सांगठनिक अनुभव जिले को मजबूती देता है, लेकिन भानु प्रताप शाही का राष्ट्रीय कद और फायरब्रांड नेतृत्व उन्हें पलामू प्रमंडल की राजनीति में सबसे अग्रणी पंक्ति में खड़ा करता है. पक्ष-विपक्ष दोनों में गढ़व का कमांड गढ़वा जिला का सियासी रसूख लंबी विरासत का हिस्सा है. अविभाजित बिहार के समय जब इंदर सिंह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष थे, तब गढ़वा के गोपीनाथ सिंह उनके भरोसेमंद सहयोगी थे. इसके बाद गिरिनाथ सिंह ने राजद प्रदेश अध्यक्ष के रूप में यह विरासत आगे बढ़ायी. वर्तमान में सत्ताधारी दल झामुमो में भी गढ़वा का दबदबा कायम है. झामुमो के केंद्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने न केवल सरकार में गढ़वा की मजबूत उपस्थिति दर्ज करायी, बल्कि संगठन में भी अपनी पकड़ मजबूत बनायी है. आज पक्ष हो या विपक्ष, पलामू प्रमंडल की राजनीति का नियंत्रण गढ़वा के दिग्गज नेताओं के हाथ में नजर आता है. सांगठनिक दृष्टिकोण से देखें तो सफलता दर और राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व में गढ़वा का सियासी रसूख बढ़ा है. भाजपा में भानु प्रताप शाही का बढ़ता कद और झामुमो में मिथिलेश ठाकुर की पकड़ इस बात का संकेत देती है कि पलामू प्रमंडल की राजनीति में अब गढ़वा ””””ड्राइविंग सीट”””” पर है.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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