गढ़वा में प्रशासन की बेरुखी, ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर बिजली के खंभों से बनाया ‘देसी जुगाड़’ वाला पुल

Garhwa News: गढ़वा के श्री बंशीधर नगर स्थित रक्सी टोला में पुल बहने के बाद ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर बिजली के खंभों से अस्थायी रास्ता बनाया. प्रशासन की अनदेखी से लोगों में भारी नाराजगी है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

श्री बंशीधर नगर से गौरव पांडेय की रिपोर्ट 

Garhwa News: सरकारें विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी कई इलाकों में डरावनी है. गढ़वा जिले के श्री बंशीधर नगर के रक्सी टोला से एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जहां सिस्टम की लाचारी पर ग्रामीणों का ‘जज्बा’ भारी पड़ा है. पिछले साल बरसात की भेंट चढ़े एक पुराने पुल की जब सुध नहीं ली गई, तो रक्सी टोला के ग्रामीणों ने खुद ही चंदा जमा किया और बिजली के खंभों के सहारे आवागमन का रास्ता तैयार कर लिया.

पुल बहने से गांवों की आवाजाही हुई ठप 

बाकी नदी पर बना यह पुल कई वर्षों पुराना था, जो इलाके के तीन प्रमुख गांवों को आपस में जोड़ता था. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछली बरसात में नदी के तेज बहाव में यह पुल पूरी तरह बह गया. पुल टूटने से न केवल आवाजाही ठप हुई, बल्कि स्कूली बच्चों, मरीजों और दैनिक मजदूरों के सामने जीवन-मरण का संकट खड़ा हो गया.

जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ग्रामीणों में भारी नाराजगी

ग्रामीणों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि यह पुल हमारे आने-जाने का एकमात्र सहारा था. पुल टूटने के बाद विधायक, सांसद और स्थानीय नेताओं से कई बार गुहार लगाई, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली. नेताओं की इसी बेरुखी के बाद लोगों ने तय किया कि अब हम किसी का इंतजार नहीं करेंगे. 

ग्रामीणों ने चंदा कर बिजली के खंभों से बनाया रास्ता

गांव वालों ने मिलकर आपसी सहयोग से पैसे इकट्ठा किए (चंदा किया) और बिजली के खंभे खरीदे. इसके बाद ‘देसी जुगाड़’ और कड़ी मेहनत से नदी के ऊपर इन खंभों को बिछाकर पैदल चलने लायक रास्ता तैयार किया. हालांकि, यह रास्ता अब भी जोखिम भरा है, लेकिन मजबूरी में ग्रामीण इसी के सहारे नदी पार कर रहे हैं. 

जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर लोग

एक ओर जहां राज्य  में पुल-पुलियों का जाल बिछाने की बात होती है, वहीं श्री बंशीधर नगर की रक्सी टोला की  यह घटना बताती है कि आज भी ग्रामीण आबादी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है.ऐसे में अब देखना यह है कि ग्रामीणों के इस आत्मनिर्भर कदम के बाद भी शासन – प्रशासन की नींद टूटती है या फिर ग्रामीण ऐसे ही जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर रहेंगे.

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लेखक के बारे में

Published by: Priya gupta

प्रिया गुप्ता पिछले एक साल से प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

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