गढ़वा से प्रभाष मिश्रा की रिपोर्ट
Garhwa News: एक तरफ सरकार और स्वास्थ्य विभाग लोगों से बढ़-चढ़कर रक्तदान करने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गढ़वा जिले के सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक की व्यवस्था इन दिनों खुद ‘वेंटिलेटर’ पर नजर आ रही है. इस भीषण गर्मी के बीच ब्लड बैंक के एसी और पंखे लंबे समय से खराब पड़े हैं. स्थिति इतनी खराब है कि रक्तदाताओं और मरीजों को गर्म वातावरण में उबलते हुए रक्तदान करना पड़ रहा है. ब्लड बैंक में सिर्फ हवा-पानी की ही किल्लत नहीं है, बल्कि जीवन रक्षक उपकरणों का भी टोटा है.
जरूरी उपकरणों की कमी पर सवाल
रक्तदाताओं से मिली जानकारी के मुताबिक रक्त संग्रह के समय ब्लड बैग के वजन और खून की सटीक मात्रा की निगरानी करने वाली मशीन ही उपलब्ध नहीं है. मशीन न होने के कारण नीचे जमीन पर रखकर अनुमान के आधार पर ही ब्लड बैग भरा जा रहा है, जो कि मेडिकल मानकों के लिहाज से बेहद गंभीर और चिंता का विषय है.
नियमित रक्तदाताओं में नाराजगी
नियमित रक्तदाता अतुलधर दुबे ने ब्लड बैंक की बदहाली पर गहरा रोष जताया है. उन्होंने कहा, “हम लोग समाज को रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं, लेकिन यहां की स्थिति डराने वाली है. न पंखे चल रहे हैं, न एसी. रक्तदान के बाद वैसे ही शरीर को आराम और ठंडक की जरूरत होती है. अगर इस उमस और गर्मी में कोई रक्तदाता बेहोश होकर गिर जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण अब लोग इस चिलचिलाती गर्मी में रक्तदान केंद्र आने से कतराने लगे हैं, जिससे ब्लड बैंक में खून की कमी भी हो सकती है. बताया जा रहा है कि ब्लड बैंक की इस दुर्दशा की जानकारी संबंधित विभागीय अधिकारियों को काफी पहले ही दे दी गई है, लेकिन अब तक इसे ठीक करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. स्वास्थ्य विभाग का यह उदासीन रवैया जागरूकता अभियानों की हवा निकाल रहा है. ब्लड बैंक जैसी संवेदनशील जगह पर ऐसी लापरवाही मरीजों की जान से खिलवाड़ के बराबर है. अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा इस खबर के बाद कब तक नींद से जागता है और व्यवस्था दुरुस्त करता है.
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