त्योहार से पहले गढ़वा में खाद्य जांच तेज, 410 किलो खराब मिठाई नष्ट

गढ़वा में खाद्य विभाग की छापेमारी में 410 किलो मिलावटी मिठाई नष्ट की गई और दो कारखाने सील किए गए। जानें क्या है पूरा मामला और क्या मिला जांच में।

गढ़वा. त्योहारों से पहले जिले में खाद्य पदार्थों की जांच तेज हुई तो गड़बड़ी के कई मामले सामने आये. 25 अगस्त से 12 सितंबर तक जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण बाजारों तक हुई कार्रवाई में करीब 410 किलो खराब, संदिग्ध या गैर-अनुमोदित रंग वाली मिठाइयां नष्ट करायी गयीं. इस दौरान 1.15 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया, जबकि श्री बंशीधर नगर के दो मिठाई कारखानों को सील किया गया.

जांच के दौरान कहीं मिठाई में अत्यधिक या गैर-अनुमोदित रंग के इस्तेमाल की बात सामने आयी, तो कहीं फ्रीजर में खराब मिठाई और बासी खाद्य सामग्री मिली. कुछ मामलों में खाद्य पदार्थ तैयार करने में औद्योगिक उपयोग वाले पदार्थ के इस्तेमाल की बात भी जांच में सामने आयी. हालांकि जिन खाद्य पदार्थों के नमूने लिये गये हैं, उनकी प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट आने के बाद ही गुणवत्ता को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकलेगा.

25 अगस्त : जलेबी में ज्यादा रंग, फ्रीजर में मिली खराब मिठाई

गढ़वा शहर में 25 अगस्त को न्यू प्लाजा होटल, आकाशगंगा होटल, ग्वालाल स्वीट्स, प्रकाश स्वीट्स, बसंती मिठाई और मां जगदंबा की जांच की गयी. न्यू प्लाजा की जलेबी में अत्यधिक रंग पाया गया. ग्वालाल स्वीट्स के फ्रीजर में पांच किलो और मां जगदंबा में तीन किलो खराब मिठाई मिली, जिसे नष्ट कराया गया. आकाशगंगा होटल में स्वच्छता की कमी और जलजमाव मिलने पर पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया.

27 अगस्त : 230 किलो मिठाई नष्ट, दो कारखाने सील

श्री बंशीधर नगर में शिवम स्वीट्स कारखाने की जांच के दौरान 120 किलो संदिग्ध रसगुल्ला और 10 किलो परवल मिठाई में अत्यधिक हरे रंग का इस्तेमाल पाया गया. दोनों को नष्ट कराया गया. जांच में चाशनी साफ करने के लिए औद्योगिक उपयोग वाले हाइड्रो उत्पाद के इस्तेमाल की बात भी सामने आयी. कारखाने पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाकर उसे सील कर दिया गया.

न्यू शिवम स्वीट्स कारखाने में 100 किलो संदिग्ध रसगुल्ला नष्ट कराया गया. यहां भी स्वच्छता की कमी और जलजमाव मिला. कारखाने पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाकर उसे सील किया गया.

दो और तीन सितंबर : पैकबंद खाद्य उत्पाद भी जांच के दायरे में

दो सितंबर को चिनियां और तीन सितंबर को मेराल में जांच के दौरान नियमों के अनुरूप नहीं पाये गये खाद्य उत्पाद दुकानों से हटाये गये. इनमें स्टिंग, रेड बुल और लोट्टे चोको पाई जैसे उत्पाद शामिल थे. मेराल में पनीर का नमूना भी जांच के लिए लिया गया.

आठ सितंबर : जलेबी और बूंदी के लड्डू में गैर-अनुमोदित रंग

रमकंडा में आठ सितंबर को 12 किलो जलेबी और 10 किलो बूंदी के लड्डू में गैर-अनुमोदित खाद्य रंग का इस्तेमाल पाया गया. दोनों को मौके पर नष्ट कराया गया. रंका और रमकंडा क्षेत्र में कुल 115 खाद्य उत्पादों की जांच की गयी.

नौ सितंबर : भंडरिया में 50 किलो संदिग्ध मिठाई नष्ट

नौ सितंबर को जिलेभर में वितरकों, थोक विक्रेताओं और खुदरा दुकानों की जांच की गयी. भंडरिया में करीब 50 किलो संदिग्ध या मिलावटी मिठाई नष्ट करायी गयी. वहीं, गढ़वा बस स्टैंड क्षेत्र की दुकानों से एक्सपायरी खाद्य सामग्री और नियमों के विपरीत पाये गये कई उत्पाद हटाये गये.

12 सितंबर : 100 किलो खराब रसगुल्ला मिला

विशुनपुरा में न्यू शुभम स्वीट्स के फ्रीजर में बासी समोसा मिला. दुकान के पास खाद्य अनुज्ञप्ति भी नहीं थी. अमित स्वीट्स में 100 किलो खराब रसगुल्ला नष्ट कराया गया. यहां चाशनी साफ करने में औद्योगिक उपयोग वाले 'राजेंद्र ब्रांड हाइड्रो' के इस्तेमाल की बात जांच में सामने आयी. दुकान पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया.

एसीएमओ बोले- जांच अभियान जारी रहेगा

एसीएमओ डॉ आरएस सिंह ने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ जांच अभियान लगातार जारी रहेगा. दुकानों, मिठाई कारखानों, थोक विक्रेताओं और वितरकों की नियमित जांच की जायेगी. गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने ग्राहकों से भी खाद्य पदार्थों की खरीदारी में सतर्क रहने की अपील की.

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लेखक के बारे में

By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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