गढ़वा से प्रभाष मिश्रा की रिपोर्ट
Garhwa, गढ़वा : गढ़वा जिला मुख्यालय के कचहरी रोड स्थित दिव्या कमल हॉस्पिटल एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई की जद में आ गया है. शनिवार को अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार और सिविल सर्जन डॉ जॉन एफ कैनेडी ने संयुक्त रूप से अस्पताल में औचक छापेमारी की. निरीक्षण के दौरान अस्पताल में भारी अनियमितता उजागर हुई और कोई भी अधिकृत चिकित्सक उपस्थित नहीं पाया गया. इस गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल को बंद करने का निर्देश दे दिया है.
अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर की विस्तृत जांच
जानकारी के अनुसार, प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत हो गई है. इस सूचना के सत्यापन और चिकित्सा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए एसडीएम और सिविल सर्जन की टीम दल-बल के साथ अस्पताल पहुंची थी. अधिकारियों ने वहां भर्ती मरीजों के उपचार, उपलब्ध सुविधाओं और डॉक्टरों के रोस्टर की गहन जांच की. हालांकि, जांच के दौरान मरीज की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों का गायब होना एक बड़ा और गंभीर मामला पाया गया.
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मरणासन्न स्थिति में भेजा गया मरीज को: अस्पताल संचालक
पूछताछ के क्रम में अस्पताल संचालक दीपक श्रीवास्तव ने दोनों अधिकारियों को बताया कि जिस व्यक्ति की मौत की बात हो रही है, उसे मरणासन्न स्थिति में यहां से रेफर कर दिया गया था, लेकिन जब अधिकारियों ने उनसे रेफरल के कागजात मांगे या उस रोगी के नाम-पता की जानकारी मांगी, तो वे आनाकानी करने लगे. संचालक के इस ढुलमुल रवैये से टीम का संदेह और बढ़ गया. इसके अलावा, आसपास के लोगों ने जो बातें बताईं, उससे भी प्रशासनिक टीम का शक गहरा गया. निरीक्षण के दौरान मौके पर एक महिला मरीज भर्ती मिली, लेकिन उसकी विवरणी भी किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं थी.
अस्पताल प्रबंधन के पास मरीजों का कोई भी रिकॉर्ड नहीं
हद तो तब हो गई जब अस्पताल प्रबंधन पिछले एक महीने में भर्ती हुए मरीजों का कोई भी रिकॉर्ड या विवरणी अधिकारियों के समक्ष उपलब्ध नहीं करा सका. साक्ष्य जुटाने के लिए जब अधिकारियों ने अस्पताल का सीसीटीवी फुटेज मांगा, तो प्रबंधन ने उसे भी देने से साफ इनकार कर दिया, जो बड़ी अनियमितता की ओर इशारा करता है. अस्पताल परिसर के अंदर एक पैथोलॉजी भी संचालित अवस्था में पाई गई. छापेमारी के वक्त वहां एक मरीज का एचआईवी टेस्ट किया जा रहा था, जबकि मौके पर कोई पैथोलॉजिस्ट मौजूद नहीं था और न ही पैथोलॉजी संचालन का कोई वैध लाइसेंस मिला. वहीं, अस्पताल के बाहर बोर्ड पर लिखे डॉक्टरों के नाम के संबंध में जब अधिकारियों ने उनसे फोन पर संपर्क किया, तो उन डॉक्टरों ने बताया कि वे अब इस अस्पताल में काम नहीं करते हैं. डॉक्टरों के नाम का सहारा लेकर बिना किसी डॉक्टर के ही अस्पताल का संचालन किया जा रहा था.
मरीज की मौत की सूचना पर भेजी गई थी टीम
सिविल सर्जन डॉ कनेडी ने कहा कि मरीज की मौत की सूचना पर जांच टीम भेजी गई थी. मौत की पुष्टि तो नहीं हुई, लेकिन जांच के दौरान अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, रिकॉर्ड गायब होने और अवैध पैथोलॉजी संचालन का गंभीर मामला सामने आया है. बाहर बोर्ड पर लिखे डॉक्टरों ने भी यहां काम करने से इनकार किया है. इसी आधार पर अस्पताल को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया गया है. जिले के सभी निजी अस्पतालों को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा. एक बार फिर हुई इस बड़ी कार्रवाई ने जिले में संचालित निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रशासन का साफ कहना है कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आगे भी ऐसी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. विभाग द्वारा अब अस्पताल के निबंधन, लाइसेंस और अन्य आवश्यक अनुमतियों से जुड़े दस्तावेजों की गहन स्क्रूटनी किए जाने की संभावना है.
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