SIR में पैसे मांगने के आरोप से चयनमुक्त हुई सेविका, कोर्ट के आदेश के बाद फिर मिलेगी जिम्मेदारी

आंगनबाड़ी सेविका जमीला खातून को मतदाताओं से पैसे मांगने के आरोप में चयनमुक्त किया गया था. हालांकि, डीसी न्यायालय में मामले की सुनवाई के बाद उन्हें उनके पद पर फिर से योगदान कराने का निर्देश दिया गया है. यह मामला एसआईआर-2026 के दौरान सामने आया था.

रंका (गढ़वा): एसआईआर-2026 के दौरान मतदाताओं से फॉर्म भरने के नाम पर पैसे मांगने के मामले में चयनमुक्त की गई. आंगनबाड़ी सेविका जमीला खातून को अब फिर से योगदान कराने का निर्देश दिया गया है. डीसी न्यायालय में मामले की सुनवाई के बाद पारित आदेश के आलोक में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने संबंधित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को सेविका को उनके पूर्व निर्धारित पद पर तत्काल योगदान कराने का निर्देश दिया है.

आरोप सही मिलने के बाद हुई थी कार्रवाई

यह मामला एसआईआर-2026 के दौरान सामने आया था. जमीला खातून का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें एसआईआर फॉर्म भरने के नाम पर मतदाताओं से 50 से 100 रुपए खर्च-पानी के रूप में मांगने की बात सामने आई थी. मामले की जांच बीडीओ स्तर से कराई गई थी. जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद संबंधित सेविका के खिलाफ कार्रवाई की गई थी. इसके बाद उप विकास आयुक्त की ओर से उन्हें चयनमुक्त कर दिया गया था.

ये भी पढ़ें- केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष बने रमेश साहू, रितेश वर्मा महामंत्री

डीसी न्यायालय में दी थी चयनमुक्ति आदेश को चुनौती

चयनमुक्त किए जाने के बाद जमीला खातून की ओर से इस आदेश को डीसी न्यायालय में चुनौती दी गई. मामले की सुनवाई के बाद 8 सितंबर 2026 को न्यायालय का आदेश पारित हुआ. इसी आदेश के आलोक में सेविका को उनके पूर्व निर्धारित पद पर फिर से योगदान कराने की प्रक्रिया शुरू की गई. जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने 12 सितंबर को बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, रंका को पत्र जारी कर जमीला खातून को तत्काल उनके पूर्व निर्धारित पद पर योगदान कराने का निर्देश दिया है. इसके बाद अब आगे की प्रक्रिया सीडीपीओ स्तर से की जानी है.

सीडीपीओ बोली- पत्र देखने के बाद ही स्पष्ट होगी प्रक्रिया

इस संबंध में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कुमारी बिंदू ने कहा कि सामान्य तौर पर किसी आंगनबाड़ी सेविका या सहायिका के चयनमुक्त होने के बाद सीधे उसी पद पर बहाल किए जाने का प्रावधान नहीं है. ऐसी स्थिति में आमसभा की प्रक्रिया अपनाई जाती है. उन्होंने कहा कि संबंधित पत्र अभी उन्होंने नहीं देखा है. पत्र और आदेश का अवलोकन करने के बाद ही वह इस मामले में स्पष्ट रूप से कुछ बता पाएंगी.

ये भी पढ़ें- इंग्लैंड में सजा भारत का रंग, गणेशोत्सव में दिखी सांस्कृतिक एकता की झलक

अब प्रशासनिक आदेश के बाद आगे की प्रक्रिया पर नजर

इस मामले में एक ओर पूर्व की कार्रवाई के दौरान बीडीओ की जांच में आरोप सही पाया जाना दर्ज है, जिसके आधार पर सेविका को चयनमुक्त किया गया था. वहीं, दूसरी ओर डीसी न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उन्हें फिर से योगदान कराने का प्रशासनिक निर्देश जारी हुआ है. अब सीडीपीओ स्तर पर संबंधित पत्र और डीसी न्यायालय के आदेश के अवलोकन के बाद आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar news desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >