इस वर्ष कम पानी में होनेवाली फसलें लगायें किसान : डीडीसी

इस वर्ष कम पानी में होनेवाली फसलें लगायें किसान : डीडीसी

प्रतिनिधि, गढ़वा जिला प्रशासन व कृषि विभाग की ओर से नवादा मोड़ स्थित बंधन मैरिज हॉल में जिलास्तरीय खरीफ कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने की. इस दौरान खरीफ मौसम को देखते हुए किसानों को वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण, कम पानी में होने वाली फसलों, कृषि योजनाओं व आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गयी, ताकि बदलते मौसम और संभावित सूखे की परिस्थितियों में भी किसानों की आय और उत्पादन सुरक्षित रह सके. कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने कहा कि मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए रणनीति में बदलाव समय की मांग है. उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील है और हर प्रकार की सहायता के लिए तत्पर है. उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि खेती से संबंधित समस्याओं के समाधान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये प्रशासन लगातार प्रयासरत है. साथ ही उन्होंने किसानों से इस वर्ष कम पानी में होनेवाली फसलों को लगाने की अपील की. जिला पशुपालन पदाधिकारी व जिला गव्य विकास पदाधिकारी ने कहा कि सूखे व कम वर्षा की स्थिति में पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो सकता है. इससे दुग्ध उत्पादन और पशुओं का स्वास्थ्य प्रभावित होता है. इस चुनौती से निपटने के लिए किसानों को नेपियर घास, सुबबूल व अन्य चारा फसलों की खेती अपने खेत के 10 से 15 प्रतिशत हिस्से में करने की सलाह दी. मौके पर जिला मत्स्य पदाधिकारी, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी आदि मौजूद थे. किसानों ने वैज्ञानिकों के सुझावों को अपनाने की अपील जिला परिषद अध्यक्ष शांति देवी ने किसानों से कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दिये गये सुझावों को अपनाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि खेती से जुड़ी किसी भी समस्या की स्थिति में जनप्रतिनिधि किसानों के साथ खड़े रहेंगे और आवश्यक सहयोग भी किया जायेगा. इस वर्ष 30 प्रतिशत कम बारिश होने की संभावना जिला कृषि पदाधिकारी खुशबू पासवान ने खरीफ मौसम की संभावित परिस्थितियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि मौसम विभाग के आकलन के अनुसार इस वर्ष लगभग 30 प्रतिशत कम बारिश होने की संभावना है. ऐसी स्थिति में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ कम पानी में होने वाली फसलों की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है. उन्होंने किसानों को अरहर, उड़द, मूंग, तिल, ज्वार, बाजरा तथा मड़ुआ जैसी फसलों को विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया.

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Author: Akarsh Aniket

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