प्रभाष मिश्रा
Garhwa: बेटियों को बोझ समझने वाली रूढ़िवादी सोच पर चोट करते हुए गढ़वा शहर के एक परिवार ने समाज के सामने एक खूबसूरत उदाहरण पेश किया है. शहर के साईं मोहल्ला निवासी महताब अली के घर पहली संतान के रूप में लक्ष्मी (बेटी) का आगमन हुआ. इस नये मेहमान के स्वागत के लिए परिवार की खुशी इस कदर परवान चढ़ी कि पूरा अस्पताल परिसर और शहर इस अनूठी पहल का गवाह बन गया. पिता महताब अली अपनी लाडली को अस्पताल से घर ले जाने के लिए अपनी कार को फूलों और गुब्बारों से पूरे वीआईपी अंदाज में सजाकर पहुंचे थे, जो दिनभर शहर में चर्चा का विषय बना रहा.
सदर अस्पताल में हुआ बच्ची का जन्म
जानकारी के अनुसार, महताब अली की पत्नी तमन्ना खातून को शनिवार दोपहर गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया. अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के बेहतर प्रयास से तमन्ना का प्रसव पूरी तरह से सामान्य (नॉर्मल डिलीवरी) रहा. जच्चा और बच्चा दोनों के पूरी तरह स्वस्थ होने के कारण डॉक्टरों ने औपचारिकताएं पूरी कर शाम को ही अस्पताल से छुट्टी दे दी.
गढ़वा 1000 लड़कों पर 945 लड़कियां
एक तरफ जहां आज भी कई परिवारों में पहली संतान के रूप में बेटी होने पर मायूसी छा जाती है, वहीं महताब के परिवार का यह जश्न ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के राष्ट्रीय नारे को धरातल पर सच साबित करता दिखा. सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो गढ़वा जिले का लिंगानुपात फिलहाल प्रति एक हजार लड़कों पर 945 लड़कियों का है. जिले में इस गैप को कम करने और लड़कियों की संख्या बढ़ाने को लेकर प्रशासन और सामाजिक संगठनों द्वारा निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. ऐसे दौर में साईं मोहल्ला के इस परिवार द्वारा दिखाई गई यह तस्वीर बेहद उत्साहजनक और समाज को नई दिशा देने वाली है.
बेटी को देख काफी खुश हुआ पूरा परिवार
सजी-धजी कार में जब नन्ही परी को लेकर महताब और तमन्ना अस्पताल से रवाना हुए, तो वहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर मुस्कान तैर गई. परिजनों ने कहा कि बेटी भगवान का रूप होती है और उनके घर पहली संतान के रूप में बेटी का आना बेहद सौभाग्य की बात है. वे अपनी बेटी को पढ़ा-लिखाकर एक बेहतर मुकाम पर पहुंचाएंगे.
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