गढ़वा के मिलावटखोरों पर एसडीएम साहेब का सर्जिकल स्ट्राइक, 3 क्विंटल मिठाइयां मिट्टी में दफन

Garhwa News: गढ़वा में प्रशासन ने मिलावटी मिठाइयों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 क्विंटल से अधिक मिठाइयों को जब्त कर नष्ट किया. जांच में केमिकल रंग और एल्युमिनियम वर्क का खुलासा हुआ. एसडीएम ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

गढ़वा से अविनाश सिंह की रिपोर्ट

Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिला मुख्यालय में मिलावटी और नकली मिठाइयों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ा एक्शन लेते हुए बुधवार को सर्जिकल स्ट्राइक चलाया. सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार के नेतृत्व में हुई इस छापेमारी में 3 क्विंटल यानी करीब 300 किलो से अधिक हानिकारक मिठाइयां जब्त की गईं. इस कार्रवाई के बाद शहर के मिठाई कारोबारियों में हड़कंप मच गया है.

जांच में चौंकाने वाले खुलासे

छापेमारी के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया. कई दुकानों में सड़ी-गली और खराब मिठाइयां पाई गईं, जो ग्राहकों को बेची जा रही थीं. इसके अलावा खाद्य पदार्थों में मानक फूड कलर की जगह होली में इस्तेमाल होने वाले केमिकल रंगों का उपयोग किया जा रहा था. यह सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है.

चांदी के वर्क की जगह एल्युमिनियम का इस्तेमाल

जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ कि मिठाइयों पर चांदी के वर्क की जगह सस्ते और खतरनाक एल्युमिनियम वर्क का इस्तेमाल किया जा रहा था. यह न सिर्फ फूड सेफ्टी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं. प्रशासन ने इसे बेहद गंभीर लापरवाही माना है.

जब्त मिठाइयों को मिट्टी में किया गया दफन

जब्त की गई जहरीली मिठाइयों का दोबारा उपयोग न हो सके, इसके लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाया. नगर परिषद की स्वच्छता टीम की मदद से जेसीबी द्वारा गहरा गड्ढा खुदवाया गया और सभी मिठाइयों को मिट्टी में दबाकर नष्ट कर दिया गया. यह कार्रवाई लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई.

खाद्य सुरक्षा विभाग को सख्त निर्देश

सदर एसडीएम संजय कुमार ने खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि सभी जब्त नमूनों की लैब जांच कराई जाए. साथ ही दोषी दुकानदारों के खिलाफ भारी जुर्माना और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जाए. उन्होंने साफ कहा कि जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा.

कहां-कहां हुई छापेमारी

यह छापेमारी गढ़वा शहर के बस स्टैंड, रंका मोड़ और अन्य प्रमुख मिठाई प्रतिष्ठानों पर की गई. प्रशासन की इस संयुक्त कार्रवाई में कई दुकानों की जांच की गई, जहां से बड़ी मात्रा में मिलावटी मिठाइयां बरामद हुईं.

कार्रवाई में शामिल अधिकारियों की टीम

इस पूरे ऑपरेशन में एसडीएम संजय कुमार के साथ खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी दीपश्री श्रीवास्तव और नगर परिषद की टीम सक्रिय रही. सभी ने मिलकर योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी को अंजाम दिया, जिससे बड़े स्तर पर गड़बड़ियों का खुलासा हो सका.

सप्लाई चेन पर भी प्रशासन की नजर

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इन नकली मिठाइयों की सप्लाई बिहार के औरंगाबाद और गया से की जा रही थी. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर कुछ प्लास्टिक कारोबारियों की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है. प्रशासन अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गया है.

पुराने कारोबारियों पर फिर कसा शिकंजा

गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में भी इसी तरह की कार्रवाई में करीब 50 क्विंटल मिठाइयां नष्ट की गई थीं और दोषियों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इसके बावजूद वही कारोबारी दोबारा सक्रिय पाए गए हैं. अब प्रशासन उनके खिलाफ और कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है.

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जनता की सेहत से समझौता नहीं

प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि लोगों की सेहत के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. आने वाले दिनों में भी इस तरह की छापेमारी जारी रहेगी, ताकि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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