क्या भवनाथपुर में बदलेगा सियासी समीकरण? JLKM के संपर्क में अनंत प्रताप देव के पूर्व करीबी दीपक प्रताप देव

भवनाथपुर की राजनीति में हलचल, दीपक प्रताप देव की जयराम महतो की पार्टी JLKM के नेताओं से मुलाकात के बाद सियासी अटकलें तेज हो गई हैं। जानें पूरी खबर.

भवनाथपुर (गढ़वा). भवनाथपुर विधानसभा की राजनीति में एक बार फिर नये सियासी समीकरण बनने के संकेत मिलने लगे हैं. झामुमो विधायक अनंत प्रताप देव के कभी करीबी रहे युवा नेता दीपक प्रताप देव की अब जयराम महतो की पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) से बढ़ती नजदीकी चर्चा में है. दीपक ने खुद फेसबुक पोस्ट के जरिए जेएलकेएम नेताओं से मुलाकात की जानकारी साझा की है. इसके बाद उनके जेएलकेएम में शामिल होने की अटकलें तेज हो गयी हैं.

आवास पर हुई JLKM नेताओं से मुलाकात

दीपक प्रताप देव ने फेसबुक पर बताया कि उनके आवास पर जेएलकेएम सुप्रीमो टाइगर जयराम महतो के निर्देश पर पार्टी की केंद्रीय उपाध्यक्ष आयशा सिंह ने शिष्टाचार और औपचारिक मुलाकात की. इस दौरान संगठन के पलामू प्रभारी भी मौजूद रहे. दीपक ने इस मुलाकात को फिलहाल शिष्टाचार मुलाकात बताया है. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे केवल औपचारिक मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. जेएलकेएम नेताओं के साथ उनकी मुलाकात के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गयी हैं.

भानु प्रताप को हराने वाली तिकड़ी में थे दीपक

दीपक प्रताप देव एक समय भवनाथपुर विधायक अनंत प्रताप देव के बेहद भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल थे. 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही को हराने के लिए अनंत प्रताप देव, ताहिर अंसारी और दीपक प्रताप देव की तिकड़ी ने चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. अनंत प्रताप देव की जीत के बाद यह तिकड़ी भवनाथपुर की राजनीति में काफी चर्चा में रही थी. हालांकि, चुनाव के बाद धीरे-धीरे राजनीतिक समीकरण बदलने लगे.

विधायक से दूरी के बाद अलग राह

दीपक ने विधायक अनंत प्रताप देव की कार्यशैली और क्षेत्र में संगठन के संचालन को लेकर सवाल उठाये और धीरे-धीरे उनसे दूरी बना ली. जुलाई 2026 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से विधायक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपनी अलग राजनीतिक राह के संकेत दिए थे. उस समय दीपक ने खुद को झामुमो के साथ बताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति अपनी निष्ठा भी जतायी थी. इसके बाद उन्होंने झामुमो से अलग होने का फैसला किया.

JLKM से जुड़ने की अटकलें

झामुमो से दूरी के बाद अब जेएलकेएम नेताओं के साथ दीपक प्रताप देव की बढ़ती नजदीकी ने भवनाथपुर की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. खास बात यह है कि दीपक ने खुद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर जेएलकेएम की केंद्रीय उपाध्यक्ष के अपने आवास पर पहुंचने की जानकारी सार्वजनिक की है.

नये राजनीतिक मंच की तलाश

ऐसे में राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या दीपक प्रताप देव जेएलकेएम के साथ अपनी नयी राजनीतिक पारी शुरू करने की तैयारी में हैं. क्या वे 2029 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अभी से नये राजनीतिक मंच की तलाश कर रहे हैं. इन सवालों का स्पष्ट जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है.

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2029 के चुनाव से पहले बन सकते हैं नये समीकरण

भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में 2029 के चुनाव को लेकर अभी से राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं. एक ओर अनंत प्रताप देव और दीपक प्रताप देव के बीच राजनीतिक दूरी सार्वजनिक हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर दीपक का जेएलकेएम के साथ संपर्क नये समीकरण की ओर इशारा कर रहा है.

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चुनावी मुकाबले को लेकर राजनीतिक दावेदार

अगर दीपक प्रताप देव जेएलकेएम में शामिल होते हैं, तो इसका असर भवनाथपुर की चुनावी राजनीति पर पड़ सकता है. खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र में संभावित चुनावी मुकाबले को लेकर राजनीतिक दावेदार अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं. फिलहाल दीपक प्रताप देव की जेएलकेएम में औपचारिक एंट्री की घोषणा नहीं हुई है. इसलिए उनकी मौजूदा गतिविधियों को राजनीतिक नजदीकी और संभावित नयी पारी के संकेत के तौर पर ही देखा जा रहा है.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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