सरस्वती नदीं गढ़वा की प्राकृतिक व सांस्कृतक धरोहर, इसे बचाना सामूहिक जिम्मेदारी

सरस्वती नदीं गढ़वा की प्राकृतिक व सांस्कृतक धरोहर, इसे बचाना सामूहिक जिम्मेदारी

नदी के दीर्घकालिक संरक्षण की रूपरेखा पर विस्तार से हुई चर्चा पर्यावरण प्रेमियों, साहित्यकारों व डॉक्टरों ने की शिरकत

प्रतिनिधि, गढ़वा

सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार के नियमित साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम ‘कॉफी विद एसडीएम’ में बुधवार को अनुमंडल कार्यालय सभागार में सरस्वतीसरस्वती नदी संरक्षण को लेकर एक विशेष परिचर्चा आयोजित की गयी. इस अनूठे संवाद कार्यक्रम में शहर के दो दर्जन से अधिक प्रबुद्ध नागरिकों, वरिष्ठ साहित्यकारों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक युवाओं ने भाग लिया. कार्यक्रम के दौरान सरस्वतीसरस्वती नदी की वर्तमान गंभीर स्थिति, स्वच्छता, अतिक्रमण मुक्ति और जनसहभागिता के जरिए दीर्घकालिक संरक्षण की रूपरेखा पर विस्तार से मंथन किया गया. अंत में एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि सरस्वतीसरस्वती नदी गढ़वा शहर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर है. इसे बचाना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि परिचर्चा में मिले सभी सुझावों पर अमल किया जायेगा और जब तक सरस्वतीसरस्वती नदी पूरी तरह पुनर्जीवित नहीं हो जाती, तब तक यह अभियान जारी रहेगा. संवाद के दौरान नवोदित कवयित्री संध्या सुमन ने कविता के माध्यम से सरस्वतीसरस्वती नदी की पीड़ा और दुर्दशा को प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया. इसके अलावा जगतारण तिवारी ने अतिक्रमण हटाने, प्रदीप पासवान ने जनजागरूकता फैलाने, धर्मनाथ झा ने सोलिंग कराने तथा नितिन तिवारी ने मेराल क्षेत्र में भी अभियान चलाने का सुझाव दिया.

निरंतर जारी रखना होगा अभियान

परिचर्चा की शुरुआत करते हुए पर्यावरण परिवार के अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार विनोद पाठक ने कहा कि ‘आपन सरस्वतीसरस्वती अभियान’ को निरंतर जारी रखना होगा. उन्होंने सुझाव दिया कि पूरी नदी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर प्रत्येक वार्ड या क्षेत्र की जिम्मेदारी अलग-अलग टोलियों को सौंप दी जाये. उन्होंने कहा कि अभी नदी बचाने का सही अवसर है, बाद में चेतने से कुछ हासिल नहीं होगा. उन्होंने नदी स्वच्छता में बेहतर कार्य करने वालों को प्रशासनिक स्तर पर सम्मानित करने की भी बात कही.

नदी किनारे बने छोटे-छोटे सीवजे ट्रीटमेंट प्लांट

स्टूडेंट क्लब छठ पूजा समिति के विनोद जायसवाल ने नदी के पुराने स्वरूप को याद करते हुए कहा कि पहले इस नदी में कोयल नदी जैसी साफ बालू हुआ करती थी, लेकिन अब इसमें सिर्फ कीचड़ और गाद भर गया है. उन्होंने नदी किनारे छोटे-छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने और प्रत्येक रविवार को सामाजिक संस्थाओं द्वारा सामूहिक श्रमदान चलाने का सुझाव दिया. नीरज श्रीधर ने कहा कि इस अभियान में शहरी क्षेत्र में वार्ड पार्षदों और ग्रामीण क्षेत्रों में मुखियाओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए. वहीं धीरेंद्र द्विवेदी ने नदी भूमि के सीमांकन के लिए तटों पर कंक्रीट के पिलर लगाने का सुझाव दिया ताकि अतिक्रमण रोका जा सके.

कचरा उठाव व्यवस्था हो दुरुस्त

अधिवक्ता राजीव रंजन तिवारी ने नदी के दोनों किनारों पर सघन पौधरोपण और नगर परिषद की कचरा उठाव व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर दिया.

पार्षद ने किया स्वयं निगरानी का आश्वासन

नगर परिषद वार्ड संख्या सात के पार्षद विनोद प्रसाद ने शमीम टेलर से लेकर जोड़ा पुल तक नदी क्षेत्र की स्वयं निगरानी करने और स्वच्छता सुनिश्चित कराने की घोषणा की. समाजसेवी दयाशंकर गुप्ता ने नदी में मांस और मछली के अवशेष फेंकने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की. युवा समाजसेवी चंदन जायसवाल ने प्लास्टिक प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने और सुखवाना स्थित कचरा निस्तारण प्लांट को जल्द चालू करने की बात कही. उन्होंने तिलैया नदी में भी ऐसा अभियान चलाने का अनुरोध करते हुए बुधवार की सफाई में प्रयुक्त डीजल का पूरा खर्च स्वयं वहन करने की घोषणा की.

चोर के चौकीदार बनाइए

गढ़वा के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. टी. पीयूष ने कहा कि चोर को चौकीदार बनाइए.उन्होंने सुझाव दिया कि जो लोग सबसे अधिक गंदगी फैलाते हैं, उन्हीं को संबंधित क्षेत्र की स्वच्छता की जिम्मेदारी दी जाये. उन्होंने कहा कि एसडीएम केवल प्रेरक की भूमिका निभा सकते हैं, असली काम समाज को मिलकर करना होगा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Akarsh Aniket

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >