गढ़वा: आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष के बच्चों को दिये जाने वाले पका हुआ भोजन और नाश्ता के वितरण को लेकर झारखंड प्रदेश आंगनवाड़ी वर्कर्स यूनियन ने बड़ा निर्णय लिया है. यूनियन के अनुसार, आठ माह से पोषाहार मद की राशि लंबित रहने और निर्धारित दरों में संशोधन नहीं होने के विरोध में एक सितंबर से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए पका भोजन और नाश्ता बंद कर दिया जायेगा.
झारखंड प्रदेश आंगनवाड़ी वर्कर्स यूनियन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बालमुकुंद सिन्हा ने बताया कि विभाग की ओर से पिछले आठ माह से आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका के संयुक्त खाते में पोषाहार मद की राशि का भुगतान नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि लगातार उधार लेकर पोषाहार सामग्री खरीदना और केंद्र का संचालन करना अब व्यवहारिक और आर्थिक रूप से कठिन हो गया है.
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बाजार भाव और सरकारी दर में अंतर का दावा
बालमुकुंद सिन्हा ने कहा कि सरकार की ओर से निर्धारित पोषाहार दर और बाजार में सामग्री की मौजूदा कीमतों में काफी अंतर है. उन्होंने बताया कि बाजार में चीनी करीब 70 रुपये प्रति किलो, रिफाइंड तेल करीब 200 रुपये प्रति लीटर और दाल करीब 150 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है. उनके अनुसार, इन वस्तुओं की सरकारी निर्धारित दर बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम है.
यूनियन का कहना है कि ऐसी स्थिति में निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों को पोषाहार उपलब्ध कराना सेविका-सहायिकाओं के लिए आर्थिक और प्रशासनिक रूप से मुश्किल हो रहा है.
वाउचर को लेकर भी जतायी चिंता
यूनियन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष ने पोषाहार सामग्री की खरीद के बाद वाउचर को लेकर भी चिंता जतायी. उन्होंने कहा कि यदि वास्तविक बाजार मूल्य पर सामग्री खरीदी जाती है और सरकारी दर के अनुरूप वाउचर बनाया जाता है, तो भविष्य में विभागीय जांच के दौरान सेविका-सहायिकाओं से निर्धारित दर पर सामग्री खरीदने को लेकर सवाल किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि इससे सेविका-सहायिकाएं अनावश्यक रूप से जांच और कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं.
तीन मांगें पूरी होने तक उधार लेकर पोषाहार नहीं
यूनियन ने कहा कि एक सितंबर से 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए पका हुआ भोजन और नाश्ता बंद रखा जायेगा. सेविका-सहायिकाएं अपनी ओर से उधार लेकर पोषाहार सामग्री की खरीदारी नहीं करेंगी.
यूनियन ने सरकार से आठ माह से लंबित पोषाहार राशि का तत्काल भुगतान करने, वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप पोषाहार की सरकारी दरों का पुनर्निर्धारण करने तथा पोषाहार व्यवस्था को व्यावहारिक और पारदर्शी बनाने के लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.
