East Singhbhum News : दो घंटे एनएच जाम के बाद छह मांगों पर सहमति बनी, छठे दिन हुआ अंतिम संस्कार

मांगों पर 15 दिनों में कार्रवाई के लिखित आश्वासन पर आंदोलन हुआ खत्म

गालूडीह. गालूडीह थाना थाना क्षेत्र के पुतड़ू निवासी सह भाजपा नेता और उलदा पंचायत की उप मुखिया आशा रानी महतो के पति तारापद महतो की हत्या के छठे दिन शनिवार को ग्रामीणों ने शव के साथ करीब दो घंटे तक एनएच जाम रखा. ग्रामीणों की छह सूत्री मांगों पर 15 दिनों में कार्रवाई का लिखित आश्वासन पर एनएच खाली किया गया. वहीं शव को पुतड़ू गांव में ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया. जाम के बाद पुलिस- ग्रामीणों के बीच कई बार तीखी बहस और नोंक-झोंक तक हुई. ज्ञात हो कि 12 जनवरी को तारापद महतो की खड़िया कॉलोनी स्थित प्रज्ञा केंद्र में घुस कर अपराधियों ने गोली मार दी थी. इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, बाकी फरार बताये जाते हैं.

एनएच के दोनों तरफ दो-दो किमी लंबा जाम:

इस बीच एनएच के दोनों तरफ करीब दो-दो किमी तक जाम लगा रहा. वाहनों के चालक व सवारी परेशान रहे. बाइक-कार को भी पार नहीं होने दिया गया. अनेक लोग पैदल चलते बने. जाम के कारण बाइक, कार और बसों के फंसने से कई लोग खासकर स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी पैदल निकल गये. कॉलेज-स्कूल छुट्टी के वक्त जाम हो गया. कई बाइक सवार गांव की कच्ची सड़कों से होकर आते जाते देखे गये.

सुबह नौ बजे से जुटने लगे थे ग्रामीण, दोपहर तीन बजे पहुंचा शव

ज्ञात हो कि ग्रामीणों ने सुबह नौ बजे एनएच जाम करने का आह्वान किया था. इसे लेकर सुबह से समाज के लोग व ग्रामीण जुटने लगे थे. शव आने के इंतजार में ग्रामीण दोपहर तीन बजे तक पुतड़ू फुटबॉल मैदान में बैठे रहे. हालांकि, जेएलकेएम नेता रामदास मुर्मू व ग्रामीण शव लेकर दोपहर तीन बजे पुतड़ू पहुंचे. यहां एंबुलेंस को पुलिस ने हाइवे से हटाकर मैदान में ले जाने को कहा, ताकि वहीं वार्ता करेंगे. इसे लेकर विरोध व हंगामा शुरू हो गया. कुछ लोग एंबुलेंस को मैदान में ले गये. हालांकि, अधिकतर ग्रामीण हाइवे पर बैठ गये. उनका कहना था यहीं वार्ता होगी. बाद में फिर एंबुलेंस को मैदान से हाइवे पर लाया गया. शव के साथ हाइवे जाम किया गया.

हत्याकांड के साजिशकर्ता की गिरफ्तारी, मुआवजा और आश्रित को नौकरी की मांग पर लगते रहे नारे

तारापद महतो हत्याकांड के साजिशकर्ता व अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी, मुआवजा और आश्रित को नौकरी की मांग पर नारे लगते रहे. पीड़ित परिवार को इंसाफ देने की मांग होती रही. आंदोलन का नेतृत्व टोटेमिक कुड़मी समाज के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष शीतल ओहदार, कुड़मी समाज के अमित महतो, लालटू महतो, हरमोहन महतो, जेएलकेएम नेता रामदास मुर्मू समेत अनेक नेता कर रहे थे. ग्रामीण जमीन दलालों को संरक्षण देना बंद करो, दोषियों को गिरफ्तार करो, तारापद महतो को न्याय दो, पुलिस प्रशासन हाय हाय, जीएम लैंड म्यूटेशन रद्द करो आदि नारेबाजी कर रहे थे.

पुलिस-प्रशासन के धैर्य से आंदोलन जल्द समाप्त हुआ.

पुलिस-प्रशासन ने धैर्य पूर्वक समझौता कर आंदोलन को समाप्त कराया. ग्रामीणों से कई बिंदू पर वार्ता हुई. इसका जवाब एसडीओ अजीत कुजूर, दंडाधिकारी, सीओ आदि ने दिये. मौके पर घाटशिला एसडीपीओ अजित कुमार कुजूर, मुसाबनी डीएसपी संदीप भकत, डीसीएलआर घाटशिला नीत निखिल सुरीन, बीडीओ यूनिका शर्मा, मुसाबनी सीओ पवन कुमार और थाना प्रभारी अंकु कुमार, मुसाबनी थाना प्रभारी अनुज कुमार सिंह, राजेश मंडल, सुनील कुमार भोकता, बहरागोड़ा के शंकर कुशवाहा, कई थानों के थानेदार व पुलिस बल तैनात रहे.

शुरुआत में सुनने को तैयार नहीं थे ग्रामीण.

इसके पूर्व पुलिस ग्रामीणों को समझाती रही, पर कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं था. अंतत: शाम 4:30 बजे प्रशासन और ग्रामीणों के बीच समझौता हुआ. पुतड़ू के पास भारी संख्या में पुलिस जवान तैनात थे. मौके पर जेएलकेएम नेता तपन महतो, पूनम महतो, उज्ज्वल महतो, खोकन महतो, सुनीता महतो, रामप्रसाद महतो, बिलटू हांसदा, दीपक रंजीत, काकुली महतो, नवीन महतो, सुलोचना महतो, भानुप्रिया महतो, भानुमति महतो, मिंटू महतो, मीनाक्षी महतो, अंजली महतो, उर्मिला महतो, करुणाकर महतो आदि उपस्थित थे.

दोनों पक्ष ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया, आश्रित को नौकरी व साजिशकर्ता को जेल भेजने पर सहमति

गालूडीह. पुतड़ू में दो घंटे एनएच जाम व हंगामा के बाद पुलिस-प्रशासन और ग्रामीणों के बीच वार्ता हुई. इसमें कई बिंदू पर समझौता हुआ. समझौता पत्र तैयार कर दोनों तरफ से हस्ताक्षर किये गये. आश्रित को नौकरी देने, साजिशकर्ता को जेल भेजने सहित अन्य मांगों पर सहमति बनी. मांगों को पूरा करने के लिए प्रशासन को 15 दिन का समय दिया गया.

सुनियोजित हत्याकांड में खानापूर्ति कर रहा प्रशासन, न्याय के लिए आंदोलन करना पड़ रहा

वार्ता में ग्रामीण मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे. अमित महतो ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि अब तक पुलिस कार्रवाई से समाज संतुष्ट नहीं है. शूटर की गिरफ्तारी को अंतिम कार्रवाई मानना गलत है. असली दोषी वे हैं, जिन्होंने जमीन विवाद को लेकर हत्या की योजना बनायी. घटना के बाद प्रशासन को दूसरा आवेदन सौंपा गया था, जिसमें जगरनाथ गोराई, लक्ष्मी चक्रवर्ती, एम विजय, विकास दुबे, हराधन सिंह समेत पांच से छह लोगों के नाम स्पष्ट रूप से उल्लेखित हैं. उन नामों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. जिन लोगों को मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है, वे खुलेआम थाने में आ-जा रहे हैं. शाम तक बाहर निकल जा रहे हैं. आम लोगों में यह संदेश जा रहा है कि प्रशासन दबाव में काम कर रहा है. यह सुनियोजित हत्या का केस है. खानापूर्ति की जा रही है. समाज को आंदोलन के लिए विवश होना पड़ रहा है.

एक भी दोषी नहीं बचेंगे साजिशकर्ता जितेंद्र दूबे को रिमांड पर लेने का आदेश मिल गया है

वार्ता में घाटशिला एसडीपीओ अजीत कुमार कुजूर ने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि पुलिस मामले को पूरी गंभीरता से ले रही है. जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रही है. बिना पुख्ता सबूत के किसी को गिरफ्तार करना संभव नहीं है. जांच में जिसकी संलिप्तता पायी जायेगी, चाहे वह कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. साजिशकर्ता जितेंद्र दूबे को रिमांड पर लेने के कई दिनों से पुलिस प्रयासरत थी. इसमें आज कामयाबी मिल गयी. उसे रिमांड पर लेने का आदेश मिल चुका है. दो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर काम हो रहा है. सभी दोषियों को सजा जरूर मिलेगी. परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस लगातार गश्त करेगी. मुसाबनी सीओ पवन कुमार ने भरोसा दिया कि मृतक के पुत्र को एचसीएल में संविदा पर नौकरी दिलायेंगे. जिस जमीन पर विवाद है, वह मामला हाई कोर्ट में चल रहा है. कोई कुछ नहीं कर सकता है. एसडीपीओ ने कहा कि एनएच जाम करना कानूनन अपराध है, हालांकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण आंदोलन सभी का अधिकार है.

पार्थिव शरीर पहुंचते ही रोया गांव, पत्नी हुई बेसुध, बेटे ने दी मुखाग्नि

गालूडीह. तारापद महतो का पार्थिव शरीर शनिवार की शाम पुतड़ू में पहुंचते ही पूरा गांव रो पड़ा. छह दिन बाद अंतिम संस्कार हुआ. इसमें ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी. पार्थिव शरीर पहले घर लाया गया. शव देखते ही पत्नी आशा रानी महतो बेसुध हो गयी. पार्थिव शरीर को बेटा अनूप महतो, भाई षष्ठी महतो ने कंधा दिया. इस दौरान परिजन और ग्रामीण फफक पड़े. तारापद महतो 12 जनवरी सुबह आठ बजे घर से निकला था. वह कोर्ट भी गया था. वहां से आकर सीधे अपने प्रज्ञा केंद्र खड़ियाकॉलोनी चलाया गया था. उन्हें मुखाग्नि पुत्र अनूप महतो ने दी. तारापद को लोगों ने नम आंखों से विदा किया.

जाम में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही

पुतड़ू के पास हाइवे जाम में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही. गांव की अधिकतर महिलाएं आंदोलन में शामिल हुईं. कई महिलाएं जमशेदपुर भी पहुंची थीं. पोस्टर में सीओ की मनमानी नहीं चलेगी. दोषियों को गिरफ्तार करो, शहर का कचरा गांव में नाय चलतो, हमारा गांव कूड़ेदान नहीं है आदि नारे लिखे थे.

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Published by: Atul pathak

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